आतंक या आर्थिक सुधार! ऑपरेशन सिंदूर के बाद PAK को IMF ने क्यों दिए पैसे?
IMF संचार विभाग की निदेशक जूली कोजाक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि पाकिस्तान ने सभी लक्ष्य पूरे कर लिए हैं और सुधारों की दिशा में कुछ प्रगति भी की है, इसलिए आईएमएफ बोर्ड ने सहायता राशि जारी करने को मंजूरी दी।
- Written By: विकास कुमार उपाध्याय
कॉन्सेप्ट फोटो, सोर्स - सोशल मीडिया
इस्लामाबाद : अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भारत की कड़ी आपत्ति और वैश्विक आलोचना के बावजूद पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर का बेलआउट दिया, जिसकी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। भारत ने इस बेलआउट पर खास तौर पर आपत्ति जताई थी।
क्योंकि यह सहायता ऐसे समय दी गई थी, जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों को मिट्टी में मिलाया था। ऐसे समय में आईएमएफ द्वारा पाकिस्तान को आर्थिक सहायता देना लोगों को पसंद नहीं आया और इसका पुरजोर विरोध हुआ। अब आईएमएफ ने इस फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
IMF संचार विभाग के निदेशक ने क्या कहा?
आईएमएफ संचार विभाग की निदेशक जूली कोजाक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि पाकिस्तान ने सभी लक्ष्य पूरे कर लिए हैं और सुधारों की दिशा में कुछ प्रगति भी की है, इसलिए आईएमएफ बोर्ड ने सहायता राशि जारी करने को मंजूरी दी। यह बेलआउट पाकिस्तान को दिए जाने वाले व्यापक सहायता पैकेज का हिस्सा है, जो कर्ज में डूबे इस देश की मदद के लिए दिया गया है।
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IMF ने पाकिस्तान के सामने रखी थीं 11 शर्तें
सितंबर 2024 में स्वीकृत विस्तारित निधि सुविधा (EFF) कार्यक्रम के तहत अब तक पाकिस्तान को करीब 2.1 बिलियन डॉलर मिल चुके हैं। भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच IMF ने पाकिस्तान के सामने संसदीय मंजूरी, बिजली पर ऋण सेवा अधिभार में वृद्धि, आयात प्रतिबंध हटाने समेत 11 नई शर्तें भी रखी थीं।
भारत ने जताया विरोध
आपको बता दें कि पिछले हफ्ते भारत ने एक बार फिर IMF से पाकिस्तान के बेलआउट पैकेज पर पुनर्विचार करने की अपील की थी। भारत ने आरोप लगाया कि इस पैसे का इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि IMF की यह सहायता पाकिस्तान के लिए आतंकवाद को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तपोषित करने के समान है।
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वहीं भारत सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘1989 से लेकर पिछले 35 सालों में पाकिस्तान को 28 साल तक IMF से वित्तीय सहायता मिली है। 2019 से अब तक सिर्फ 5 सालों में पाकिस्तान ने 4 बार IMF से सहायता ली है। यदि पिछली योजनाओं से वास्तव में आर्थिक स्थिरता आई होती, तो पाकिस्तान को बार-बार आईएमएफ से संपर्क करने की जरूरत नहीं पड़ती।’
