17 साल बाद बांग्लादेश लौटे पूर्व पीएम के बेटे Tarique Rahman, चुनाव से पहले यूनुस सरकार में हलचल
Bangladesh Election 2025: बांग्लादेश की राजनीति में 17 साल बाद तारिक रहमान की वापसी ने खलबली मचा दी है। फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले BNP के बड़े नेता की एंट्री से सत्ता के समीकरण बदल सकते हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
बांग्लादेश में 17 साल बाद तारिक रहमान की वापसी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Tarique Rahman Return Dhaka: बांग्लादेश इस समय अपने इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है, जहां हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच एक पुराने और शक्तिशाली खिलाड़ी की वापसी हुई है। 17 वर्षों के लंबे स्व-निर्वासन के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान गुरुवार को लंदन से ढाका लौट आए हैं।
उनकी यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब देश फरवरी में होने वाले आम चुनावों की तैयारी कर रहा है और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की विदाई के बाद राजनीतिक मैदान पूरी तरह खाली है। रहमान की एंट्री ने न केवल अंतरिम सरकार बल्कि कट्टरपंथी गुटों के बीच भी बेचैनी पैदा कर दी है।
लंदन से ढाका तक का सफर और भव्य स्वागत की तैयारी
द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, तारिक रहमान अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जायमा रहमान के साथ बिमान बांग्लादेश एयरलाइंस की विशेष फ्लाइट से ढाका पहुंचे हैं। विमान के भीतर से आई तस्वीरों में परिवार की खुशी साफ झलक रही है, जो लंबे समय बाद अपने वतन लौट रहे हैं।
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ढाका एयरपोर्ट पर उतरते ही BNP के शीर्ष नेताओं ने उनका स्वागत किया। पार्टी ने राजधानी में लाखों समर्थकों की भीड़ जुटाकर अपनी ताकत दिखाने का लक्ष्य रखा है। एयरपोर्ट से सीधे वह एक बड़ी रैली को संबोधित करने जाएंगे, जहां से वे बांग्लादेश की जनता के लिए अपना विजन साझा करेंगे और फिर अपनी बीमार मां, खालिदा जिया से अस्पताल में मुलाकात करेंगे।
फरवरी चुनाव और सत्ता का नया समीकरण
60 वर्षीय तारिक रहमान को फरवरी 2025 में होने वाले चुनावों के लिए प्रधानमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। 2001 से 2006 तक जब BNP सत्ता में थी, तब रहमान सरकार के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक थे।
अब जब शेख हसीना की अवामी लीग को भंग कर दिया गया है, तो BNP मुख्य राजनीतिक शक्ति बनकर उभरी है। हालांकि, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार और जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठन रहमान के बढ़ते प्रभाव से घबराए हुए हैं। जमात-ए-इस्लामी, जो कभी BNP की सहयोगी थी, अब खुद को मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश कर रही है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है।
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चुनौतियों भरा भविष्य और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
तारिक रहमान की वापसी के मद्देनजर अंतरिम सरकार ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। रहमान का राजनीतिक सफर विवादों और संघर्षों से भरा रहा है, 2007 में गिरफ्तारी के बाद वे इलाज के लिए ब्रिटेन चले गए थे और तब से वहीं से पार्टी का संचालन कर रहे थे।
अपनी वापसी के बाद, वह सबसे पहले हाल ही में मारे गए छात्र नेता उस्मान हादी की कब्र पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, जो इस समय देश में युवाओं के गुस्से का प्रतीक बने हुए हैं। रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की लड़खड़ाती कानून-व्यवस्था को सुधारने का भरोसा दिलाना और बिखर चुके राजनीतिक तंत्र को फिर से खड़ा करना है।
