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सालों तक भारत समेत दुनियाभर को लूटा…अब इन देशों से किस बात का हर्जाना मांग रहा ब्रिटेन? जानें पूरा विवाद
- Written By: अक्षय साहू
Jamaica Demand Reparations on Britain:ब्रिटिश नेता सुएला ब्रेवरमैन के भारत और जमैका से हर्जाना मांगने के दावे ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। जानिए क्या है 45 ट्रिलियन डॉलर की लूट का पूरा सच।

जमैका ने ब्रिटेन हर्जाने की मांग की (AI जेनरेटेड इमेज)
British Colonial Reparations Controversy: ब्रिटेन ने 18वीं और 19वीं सदी में भारत समेत दुनिया के लगभग 50 देशों पर औपनिवेशिक शासन स्थापित किया था। इस दौरान ब्रिटेन ने इन देशों में कई अत्याचार किए और यहां की धन संपदा को लूटकर अपने खजाने भरे, लेकिन अब उसी ब्रिटेन की एक नेता ने मांग की है कि उपनिवेश रहे इन देशों को ब्रिटेन को हर्जाना देना चाहिए।
इस नेता का नाम है सुएला ब्रेवरमैन। सुएला भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक हैं। वह ब्रिटेन की पूर्व गृहमंत्री भी रह चुकी हैं। उनका कहना है कि उपनिवेश रहे इन देशों को ब्रिटेन से हर्जाना मांगने के बजाए, ब्रिटिश साम्राज्य ने जो पैसा उनके विकास कार्यों के लिए खर्च किया था उसे लौटाना चाहिए। सुएला ने इसमें भारत का नाम भी प्रमुखता से लिया है। उन्होंने दावा किया कि वो ब्रिटेन ही था, जिसकी वजह से इन देशों में आज लोकतंत्र है, रेलवे लाइन हैं और ये विकसित हैं। ऐसे में सवाल आता है कि सुएला ब्रेवरमैन के दावे में कितनी सच्चाई है? यह पूरा विवाद क्या है? और क्यों ब्रिटेन इन देशों से मुआवजे की मांग कर रहा है?
क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत हाल ही में कैरेबियाई देश जमैका से हुई। जमैका भी भारत की ही तरह सालों तक ब्रिटिश साम्राज्य का गुलाम था। जमैका ने हाल ही में ऐलान किया वह ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स III से मिलने जाएगा और उनसे औपनिवेशिक काल में हुए दास व्यापार (Slave Trade) के लिए हर्जाने की मांग करेगा। जमैका की सरकार ने ऐलान किया कि वो इसके लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजने वाले हैं जो 6 सितंबर को इंग्लैंड में किंग चार्ल्स से मुलाकात करेगा और उनके सामने अपनी मांग रखेगा।
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Later this year, Jamaica will take the case for reparations directly to King Charles, lodging a formal petition. It is getting harder and harder for British institutions to maintain their favoured tactic of simply ignoring calls for repair.https://t.co/zJJGqCYpze — Bell Ribeiro-Addy MP (@BellRibeiroAddy) July 1, 2026
जमैका के इसी ऐलान के विरोध में सुएला ब्रेवरमैन ने बयान दिया। इसमें उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के आम नागरिकों को 18वीं और 19वीं सदी में हुई घटनाओं को लिए परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के उपनिवेश रहे देशों को हर्जाना नहीं मांगना चाहिए। क्योंकि ब्रिटेन ने भारत जैसे देशों में रेलवे लाइन बिछाई, वहां के विकास में अहम योगदान दिया और इसके लिए लाखों ब्रिटिश पाउंड खर्च किए। ऐसे में इन देशों को हर्जाना मांगने की जगह ब्रिटेन को वे पैंसे लौटाने चाहिए।
जमैका से कितनी रकम की मांग गई?
The British Empire did so much good for the world. Of course slavery was abhorrent but to expect the British people of the 21st century to pay for actions that took place in the 18th century has no basis in law. If the government is seriously thinking about this then former… https://t.co/JWwDtdMEPj — Suella Braverman (@SuellaBraverman) July 3, 2026
हालांकि, सुएला ने अपने बयान में किसी रकम का जिक्र नहीं किया। लेकिन उन्होंने कहा कि अगर जमैका ब्रिटेन से हर्जाने की मांग करता है, तो उसे यह भी स्वीकार करना होगा कि ब्रिटेन ने औपनिवेशिक काल में उसके विकास के लिए अहम योगदान दिया। और अगर ऐसा है तो ब्रिटेन को नहीं, बल्कि जमैका हो हमें मुआवजा देना चाहिए।
ब्रिटेन से हर्जाना क्यों मांग रहा जमैका?
साल 1833 में ब्रिटेन ने दास प्रथा को खत्म किया था, इस दौरान ब्रिटिश संसद में एक कानून किया गया था। इसके तरह ब्रिटिश शासन ने 2 करोड़ पाउंड का कर्ज लिया, जो उस ब्रिटेन के कुल बजट का 40% था। ब्रिटेन ने यह कर्ज हर्जाना देने के लिए लिया था। यह हर्जाना उन गोरे अंग्रेजों को दिया गया था जिनका दास प्रथा के खत्म होने से नुकसान हुआ था। यानी जिन्हें इस कानून के चलते अपने गुलामों को आजाद करना पड़ा था।
ब्रिटिश राज में जमैका में आम था दासों को खरीदना और बेचना (सोर्स- सोशल मीडिया)
जबकि जो गुलाम सालों से अत्याचार सहकर काम कर रहे थे उन्हें कुछ नहीं मिला। इस हर्जाने के आखिरी किस्त साल 2015 में दी गई थी। मतलब दास प्रथा खत्म होने के सालों बाद, इसमें उन अश्वेत नागरिकों द्वारा सरकार को टैक्स के रूप में दी गई रकम भी शामिल हैं। वही पैसे सरकार ने उनके पूर्वजों पर अत्याचार करने वाले लोगों को दे दिया। जमैका इसे गलत मानता है और उसका कहना है कि हर्जाने पर हक उन नागरिकों का है जिनके पुरखों का शोषण किया गया।
क्या सच में ब्रिटेन ने विकास के लिए बिछाई रेल लाइन
इस बात में कोई शक नहीं है कि ब्रिटेन ने अपनी कॉलोनियों में रेलवे लाइन बिछाई, लेकिन ब्रिटेन ने यह रेलवे लाइन जमैका या भारत के विकास के लिए नहीं बल्कि अपने व्यापार में तेजी लाने के किया था। ताकि दूर-दराज इलाकों से कच्चा माल बंदरगाहों तक आसानी से पहुंचाया जा सके।
ब्रिटेन ने भारत से कितना लूटा?
ब्रिटेन ने भारत पर करीब दो सौ सालों तक राज किया था। इस दौरान ब्रिटेन ने भारत में व्यापार और कर व्यवस्था के माध्यम से भारतीयों से भारी कर वसूला। आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेन ने भारत से करीब 45 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 45 लाख करोड़ डॉलर) की संपत्ति की लूट की। यह रकम आज के ब्रिटेन की लगभग 4.26 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी से करीब 11 गुना अधिक है। यह दावा कोलंबिया यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया है।
ब्रिटिश ने भारत से की करोड़ों की लूट (AI जेनरेटेड फोटो)
ब्रिटिश प्रशासन भारतीयों से भारी कर (टैक्स) वसूलता था। फिर उसी कर से प्राप्त धन का उपयोग भारत से सूती कपड़ा, मसाले और अन्य मूल्यवान वस्तुएँ खरीदने में किया जाता था। इन वस्तुओं को यूरोप में ऊँचे दामों पर बेचकर होने वाला लाभ ब्रिटेन ले जाया जाता था। दूसरे शब्दों में, भारतीयों की अपनी संपत्ति उनके ही कर के पैसे से खरीदी जाती थी, जबकि उससे होने वाला मुनाफा सीधे लंदन के खजाने और ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को मजबूत करता था।
यह भी पढ़ें- Nijjar Murder: निज्जर हत्याकांड में भारत को क्लीन चिट, अमेरिका में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का खुलासा
ब्रिटेन की देन है लोकतंत्र?
सुएला ब्रेवरमैन ने अपने बयान में दावा किया है कि भारत समेत तमाम औपनिवेशिक देशों में लोकतंत्र ब्रिटेन की ही देन है। लेकिन सच इसके विपरीत है। भारत में लोकतंत्र ब्रिटेन की देन नहीं है, बल्कि सालों की लड़ाई के बाद जब देश को आजादी मिली, तो भारत के संविधान निर्माताओं और देश के नेताओं ने भारत को लोकतांत्रिक देश बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसमें ब्रिटेन का कोई योगदान नहीं था। इसके अलावा ब्रिटेन की नीतियों के कारण भारत में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।
Suella braverman sparks controversy over british colonial reparations
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