ईरान में ‘मुजतबा युग’ की शुरुआत… क्या जूनियर खामेनेई संभाल पाएंगे पिता की विरासत और सत्ता?
Iran New Leader: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा के सामने जर्जर अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों जैसी बड़ी चुनौतियां हैं, जिन्हें वे अपने मजबूत सैन्य और धार्मिक नेटवर्क से सुलझाना चाहते हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई (सोर्स-सोशल मीडिया)
Challenges Of Iranian Leadership: ईरान के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है जिसे लोग ‘मुजतबा युग’ के नाम से पुकार रहे हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद उनके बेटे मुजतबा का सत्ता के शीर्ष पर पहुंचना एक बहुत बड़ी घटना है। यह बदलाव केवल पद का नहीं बल्कि ईरान की क्रांतिकारी विचारधारा और उसकी स्थिरता की एक कठिन परीक्षा भी है। ईरानी नेतृत्व की चुनौतियों को समझते हुए मुजतबा को अब देश की आंतरिक और बाहरी समस्याओं का ठोस समाधान ढूंढना होगा।
सत्ता के तीन मजबूत स्तंभ
मुजतबा खामेनेई ने दशकों तक पर्दे के पीछे रहकर अपनी पकड़ को बहुत मजबूत और असरदार बनाया है। उन्होंने कुम के मदरसों में शिक्षा पाकर मौलवी वर्ग में अपनी एक अलग पहचान और स्वीकार्यता हासिल की है। इसके अलावा वे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और खुफिया सेवाओं के शीर्ष अधिकारियों के भी बहुत करीबी माने जाते हैं।
राजनीतिक और वित्तीय नेटवर्क पर उनका नियंत्रण उन्हें एक बेहद शक्तिशाली नेता के रूप में स्थापित करता है। सर्वोच्च नेता के कार्यालय के माध्यम से उन्होंने प्रशासन और अर्थव्यवस्था पर अपनी बहुत गहरी पैठ बनाई है। यही कारण है कि उन्हें सत्ता का असली और सबसे प्रभावशाली उत्तराधिकारी माना जा रहा है।
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सेना और मिलिशिया का कवच
ईरान की असली ताकत रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC है जिसके साथ मुजतबा के रिश्ते काफी पुराने और गहरे हैं। ईरान-इराक युद्ध के समय उन्होंने ‘हबीब इब्न मजा हिर बटालियन’ में सेवा दी थी जिससे सैन्य संबंध बने। आज सेना के बड़े दिग्गज उनके सबसे भरोसेमंद साथियों की सूची में प्रमुखता से शामिल हैं।
आंतरिक सुरक्षा के लिए उनके पास बासिज मिलिशिया जैसा एक बहुत बड़ा और शक्तिशाली सुरक्षा कवच मौजूद है। इस फौज में करीब 6 लाख सक्रिय सदस्य हैं जो किसी भी आंतरिक विद्रोह को दबाने की क्षमता रखते हैं। मुजतबा इस मिलिशिया का उपयोग अपनी सत्ता को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए जरूर करेंगे।
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भविष्य की कठिन राह और चुनौतियां
मुजतबा खामेनेई के लिए यह रास्ता फूलों की सेज नहीं है क्योंकि देश का बुनियादी ढांचा काफी जर्जर हो चुका है। कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय अस्थिरता ने आम जनता के जीवन को बहुत अधिक कठिन बना दिया है। ऐसे में उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा और व्यावहारिकता के बीच एक सही संतुलन बनाना होगा।
एक रहस्यमयी छवि वाले मुजतबा के सामने नई पीढ़ी की उम्मीदों को पूरा करने की भी बड़ी चुनौती है। उन्हें अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे तनाव के बीच कूटनीति का सहारा लेना पड़ सकता है। उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे पुराने संकल्पों को आधुनिकता के साथ कैसे जोड़ते हैं।
