

Sri Lanka Easter Bombing Verdict 2026: श्रीलंका की एक अदालत ने मंगलवार को 2019 के ईस्टर फिदायीन हमला मामले में सजा का ऐलान किया। अदालत ने मामले के 24 आरोपियों में से 15 को दोषी करार देते हुए 200 साल से अधिक के कारावास की सजा सुनाई है। 2019 के आतंकी हमले में 270 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
श्रीलंकाई मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, कोलंबो हाईकोर्ट की एक बेंच ने सभी 15 दोषियों को 220-220 साल की सजा सुनाई है। जस्टिस नवरत्ने मारासिंघे, जस्टिस रामनाथन कन्नन और जस्टिस सुजीवा निसांका की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए 15 आरोपियों को दोषी करार दिया। वहीं 9 अन्य लोगों को बरी कर दिया।
बता दें कि साल 2019 में ईस्टर के मौके पर ISIS से जुड़े लोकल इस्लामी चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात (NTJ) के 9 फिदायीन हमलावरों ने श्रीलंका में हमलों को अंजाम दिया था। हमलावरों ने 3 कैथोलिक चर्च और 3 आलीशान होटलों को निशाना बनाया था। इन हमलों में 11 भारतीय नागरिकों समेत कुल 270 लोगों की मौत हो गई थी, वहीं 500 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
पांच साल तक चली सुनवाई के बाद अब कोलंबो हाईकोर्ट की बेंच ने दोषियों के खिलाफ सजा का ऐलान किया है। अदालत ने मुख्य आरोपी नौफर मौलवी को भी दोषी ठहराया। आरोपियों के खिलाफ 23 हजार 270 आरोप तय किए गए थे। वहीं अभियोजन पक्ष की तरफ से इस मामले में 2,309 गवाहों ने बयान दर्ज कराए गए।
श्रीलंका में हुए इस फिदायीन हमले का भारत से फरार कट्टरपंथी धर्म प्रचारक जाकिर नाइक से भी खास संबंध था। हमले के बाद श्रीलंकाई सुरक्षा बलों ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए आतंकियों ने सुरक्षा बलों को बताया कि वह जाकिर नाइक के ऑनलाइन वीडियो देखकर आतंकी संगठन में शामिल हुए थे। हालांकि, तब तक जाकिर नाइक भारत से भागकर मलेशिया चला गया था और तब से वहीं रह रहा है।
इस हमले के बाद श्रीलंका में सियासी विवाद भी खड़ा हो गया था। तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और पीएम रानिल विक्रमसिंघे पर पहले से खुफिया जानकारी होने के बावजूद हमलों को नहीं रोक पाने के आरोप लगे थे। जबकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने श्रीलंका को हफ्तों पहले आतंकी हमले के संकेत दिए थे।