Alert! धरती की ओर बढ़ रहा है सूरज का महातूफान, भारत समेत दुनिया भर में सोमवार को दिखेगा असर; कितना बड़ा है खतरा

Solar Storm: सूर्य से निकले एक भीषण ‘कैनिबल’ सौर तूफान के सोमवार को पृथ्वी से टकराने की आशंका है। इसके प्रभाव से भारत के पहाड़ी इलाकों समेत दुनिया भर में दुर्लभ अरोरा रोशनी दिखने की संभावना है।
Alert! A massive solar storm is heading towards Earth; impact to be felt worldwide, including India, on Monday how serious is the threat?
सांकेतिक एआई फोटो
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Solar Storm NASA Warning: अंतरिक्ष के विशाल आंगन में एक बड़ी हलचल हुई है, जिसका सीधा असर हमारी पृथ्वी पर पड़ने वाला है। सूर्य की सतह पर एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ है, जिससे निकले सौर तूफान ने सीधे पृथ्वी की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, सोमवार, 8 जून 2026 को यह महातूफान हमारे ग्रह से किसी भी समय टकरा सकता है। यह इस साल का अब तक का सबसे भीषण सौर विस्फोट माना जा रहा है, जिसने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) सहित दुनिया भर के वैज्ञानिकों को अलर्ट पर रख दिया है।

एक्टिव रीजन 4461 से शुरू हुआ खतरा

इस पूरी घटना का केंद्र सूर्य का एक 'एक्टिव रीजन 4461' है। बता दें कि 6 जून 2026 की सुबह इस क्षेत्र में एक जबरदस्त धमाका हुआ, जिसे वैज्ञानिकों ने 'M1.8' श्रेणी का सोलर फ्लेयर करार दिया है। हालांकि यह मध्यम स्तर का विस्फोट है, लेकिन इससे निकलने वाला चुंबकीय फिलामेंट बेहद घना और भारी है। बिजली के एक तैरते हुए पुल जैसा दिखने वाला यह फिलामेंट 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की तूफानी रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है।

क्या है ‘कैनिबल’ तूफान?

इस सौर तूफान को 'कैनिबल सीएमई' कहा जा रहा है। दरअसल, इसी हफ्ते 3 जून को सूर्य के एक अन्य हिस्से 'एक्टिव रीजन 4455' से कुछ कमजोर सौर लहरें निकली थीं। अब खतरा यह है कि यह नया और सुपरफास्ट तूफान रास्ते में उन पुरानी लहरों को पीछे छोड़कर उन्हें अपने भीतर समाहित कर लेगा। जब एक तेज तूफान अपने से आगे चल रहे धीमे तूफान को 'निगल' जाता है, तो उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है और वह पृथ्वी पर कहीं अधिक घातक प्रहार करता है।

भारत में दिखेगा अरोरा का दुर्लभ नजारा

मौसम वैज्ञानिकों ने शुरुआत में इसे 'G3' श्रेणी का मजबूत भू-चुंबकीय तूफान माना था, लेकिन अब इसके 'G4' यानी गंभीर श्रेणी में बदलने की पूरी आशंका है। यदि ऐसा होता है, तो इसका सबसे खूबसूरत असर आसमान में देखने को मिलेगा।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस तूफान के कारण उत्तरी भारत के पहाड़ी क्षेत्रों, पूरे यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के आसमान में रंग-बिरंगी आकाशीय रोशनी देखा जा सकेगी जिसे 'अरोरा' कहा जाता है।

पृथ्वी की सुरक्षा ढाल पर दबाव

इस तूफान का सटीक प्रभाव पृथ्वी की चुंबकीय दिशा (Bz) पर निर्भर करेगा। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि इस तूफान का चुंबकीय रुख दक्षिण की ओर हुआ, तो यह हमारी सुरक्षा ढाल यानी मैग्नेटोस्फीयर को कुछ समय के लिए भेद सकता है। ऐसी स्थिति में सूर्य की ऊर्जा सीधे वायुमंडल में प्रवेश कर जाएगी, जिससे आसमान हरे, बैंगनी और लाल रंगों से जगमगा उठेगा। हालांकि, वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर बनाए हुए हैं ताकि संचार प्रणालियों पर पड़ने वाले किसी भी संभावित खतरे की समय रहते जानकारी दी जा सके।

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