बलूच लोग 11 अगस्त को ही क्यों मनाएंगे Balochistan Independence Day? जानें पूरा इतिहास
Balochistan Independence Day: पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाता है, जबकि बलूच लोग 11 अगस्त को बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस मनायेंगे। जानिए क्यों बलूच लोग 11 अगस्त को स्वतंत्रता मनाएंगे।
- Written By: प्रिया सिंह
11 अगस्त बलूचिस्तान स्वतंत्रता दिवस (सोर्स- AI जनरेटेड)
Why Will Balochistan Independence Be Celebrated On August 11th: पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस हर साल 14 अगस्त को मनाता है। लेकिन बलूच समुदाय के लोग इससे ठीक तीन दिन पहले 11 अगस्त को बलूचिस्तान का अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने वाले हैं। यह ऐतिहासिक तारीख दशकों पुराने एक विवाद का प्रतीक मानी जाती है। बलूचिस्तान की आज़ादी के इस बड़े संघर्ष का इतिहास वर्ष 1947 में हुए भारत के विभाजन और कलात रियासत के भविष्य से पूरी तरह जुड़ा है।
बलूच राष्ट्रवादियों का हमेशा से मानना है कि पाकिस्तान के वजूद में आने से पहले ही उनके इस क्षेत्र की अपनी एक स्वतंत्र पहचान थी। बलूचिस्तान के लोग 11 अगस्त को उस ऐतिहासिक दौर की याद के रूप में देखते हैं जब उनके देश ने संप्रभुता की घोषणा की थी। हालांकि पाकिस्तान सरकार हमेशा से ही बलूचिस्तान को अपना एक अटूट और अभिन्न हिस्सा मानती आई है।
11 अगस्त का असली महत्व
11 अगस्त की इस ऐतिहासिक तारीख का इतिहास तब शुरू होता है जब भारतीय उपमहाद्वीप में ब्रिटिश हुकूमत अपनी आखिरी सांसें गिन रही थी। उस वक्त कलात रियासत के शासक मीर अहमद यार खान का तर्क था कि उनकी रियासत ब्रिटिश भारत का हिस्सा नहीं थी। उनका दर्जा अन्य देशी रियासतों से अलग था और ब्रिटिश क्राउन के साथ सीधे और स्वतंत्र समझौते थे।
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इसी पृष्ठभूमि में 11 अगस्त 1947 को ब्रिटिश सरकार, कलात के खान और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच ‘स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट’ यानी यथास्थिति का समझौता हुआ। बलूच इस समझौते को कलात की स्वतंत्र स्थिति और संप्रभुता के प्रमाण के रूप में देखते हैं। इसके बाद ही कलात के खान ने स्वतंत्रता की घोषणा की और दो सदनों वाला विधायी ढांचा तैयार किया।
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पाकिस्तान में जबरन विलय
विभाजन के बाद कलात का राजनीतिक भविष्य बहुत ही अनिश्चितताओं और गहरे धुंधलेपन से भरा रहा। बलूच राष्ट्रवादियों के ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, दिसंबर 1947 में कलात की विधायिका ने पाकिस्तान में शामिल होने के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया था। लेकिन इसके बाद के महीनों में कलात और पाकिस्तान के बीच संबंध बहुत तेजी से बिगड़ते चले गए।
अंततः 27 मार्च 1948 को पाकिस्तानी सेना कलात में जबरन दाखिल हो गई और वहां नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके बाद कलात के खान को विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने पड़े। बलूच राष्ट्रवादी इसे जबरन किया गया कब्जा मानते हैं जिसने उनसे संप्रभुता छीन ली। यही वजह है कि वे पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस को ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाते हैं।
