Sheikh Hasina की सजा पर बड़ा फैसला: उम्रकैद को फांसी में बदलने की याचिका पर 20 जनवरी को सुनवाई
Hasina Death Penalty: शेख हसीना की उम्रकैद को फांसी में बदलने वाली याचिका पर बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट 20 जनवरी को सुनवाई करेगा। अभियोजन पक्ष ने मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए कड़ी सजा की मांग की है।
- Written By: प्रिया सिंह
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (सोर्स-सोशल मीडिया)
Bangladesh Supreme Court Hasina appeal hearing: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की न्यायिक मुश्किलों में एक नया और गंभीर मोड़ आ गया है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को अब मौत की सजा में बदलने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है। इस महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन ने 20 जनवरी की तारीख मुकर्रर की है। यह मामला जुलाई में हुए सामूहिक विद्रोह और मानवता के खिलाफ किए गए कथित अपराधों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
अपीलेट डिवीजन के जज-इन-चैंबर जस्टिस एमडी रेजाउल हक ने इस याचिका पर सुनवाई की तारीख तय करते हुए आदेश जारी किया है। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की उस दलील को स्वीकार कर लिया है जिसमें मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। यह मामला अपीलेट डिवीजन चैंबर जज कोर्ट की कार्यसूची में आइटम नंबर 58 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
सजा बढ़ाने की मांग
आईसीटी के अभियोजक गाजी एमएच तममी ने तर्क दिया है कि जुलाई विद्रोह के दौरान किए गए अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने हसीना और पूर्व मंत्री असदुज्जमां खान कमाल के लिए केवल मौत की सजा की मांग की है। अभियोजन पक्ष ने अपनी अपील में आठ ठोस कारण बताए हैं जिनके आधार पर सजा को बढ़ाने की वकालत की गई है।
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न्यायाधिकरण का पिछला फैसला
17 नवंबर को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-1 ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोनों नेताओं को विभिन्न आरोपों के तहत दोषी ठहराया था। तब अदालत ने उन्हें एक बड़े आरोप में मौत की सजा और दूसरे आरोप में प्राकृतिक मौत तक जेल की सजा सुनाई थी। अब अभियोजन पक्ष चाहता है कि सभी गंभीर आरोपों में सजा को एक समान रूप से मौत की सजा में बदल दिया जाए।
अपील की कानूनी प्रक्रिया
कानूनी नियमों के अनुसार न्यायाधिकरण का फैसला आने के 30 दिनों के भीतर सजा के खिलाफ अपील दायर करनी होती है। अभियोजन पक्ष ने 15 दिसंबर 2025 को ही यह अपील फाइल कर दी थी ताकि समय सीमा का पालन किया जा सके। कानून में प्रावधान है कि ऐसी अपीलों का निपटारा 60 दिनों के भीतर हो जाना चाहिए जिससे न्याय प्रक्रिया में तेजी बनी रहे।
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भविष्य की कूटनीतिक हलचल
20 जनवरी को होने वाली यह सुनवाई न केवल शेख हसीना के भविष्य के लिए निर्णायक होगी बल्कि बांग्लादेश की राजनीति को भी प्रभावित करेगी। मानवता के खिलाफ अपराधों के मामलों में मौत की सजा की मांग ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का ध्यान भी खींचा है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह अभियोजन की दलीलों को किस तरह स्वीकार करता है।
