सऊदी ने तैयार किया इस्लामिक NATO...पाकिस्तान समेत 14 मुस्लिम देश बने सदस्य, ओमान और UAE ने क्यों बनाई दूरी?

Saudi Arabia: सऊदी अरब ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब की सुरक्षा के लिए 14 देशों का समुद्री गठबंधन बनाया है। इसका लक्ष्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना है।
Saudi Arabia Maritime Defence Alliance
सऊदी अरब ने समुद्री रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाया (AI जनरेटेड इमेज)
Updated on

Saudi Arabia Maritime Defence Alliance: सऊदी अरब ने लाल सागर, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और अदन की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए 14 देशों के नए गठबंधन की घोषणा की है। इसका मकसद इन महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना, वैश्विक व्यापार को बाधित होने से बचाना और सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाना है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने इसे सामूहिक समुद्री सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

सऊदी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह गठबंधन अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। सदस्य देश समुद्री खतरों से निपटने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान लेकर जाने वाले जहाज बिना किसी रुकावट के अपनी मंजिल तक पहुंच सकें। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी स्थिर रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। आइए आपको बताते हैं कि सऊदी अरब की पहल पर बनाया गया गठबंधन क्या है? इसमें कौन-कौन से देश हैं? और ओमान और यूएई इसमें क्यों शामिल नहीं हुए?

हूती हमलों ने बढ़ाई सऊदी की चिंता

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दबाव बना हुआ है। यह मार्ग दुनिया के कुल तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत संभालता है। ऐसे हालात में वैकल्पिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

Saudi Arabia Maritime Defence Alliance
सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान अल सऊद (सोर्स- सोशल मीडिया)

पिछले कुछ महीनों में यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी से गुजरने वाले कई व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है। इन हमलों के कारण वैश्विक शिपिंग कंपनियों और तेल निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। हाल ही में हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का भी ऐलान किया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

बैठक में 43 देशों ने लिया हिस्सा

गठबंधन के गठन को लेकर आयोजित बैठक में कुल 51 देशों को आमंत्रित किया गया था। इनमें से 43 देशों ने भाग लिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तुर्की, कुवैत, बहरीन, कतर, जॉर्डन, मिस्र, पाकिस्तान, जिबूती, सोमालिया, बांग्लादेश, यमन, सूडान और कोमोरोस जैसे देश इस पहल का हिस्सा बन चुके हैं या इसमें शामिल होने की प्रक्रिया में हैं।

Saudi Arabia Maritime Defence Alliance
सऊदी अरब के गठबंधन में पाकिस्तान में 14 मुस्लिम देश शामिल (AI जनरेटेड इमेज)

सऊदी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि गठबंधन केवल औपचारिक मंच नहीं होगा, बल्कि सदस्य देश समुद्री खतरों से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा करेंगे। इसके अलावा संयुक्त नौसैनिक अभियान चलाए जाएंगे और नियमित सैन्य अभ्यास भी आयोजित किए जाएंगे। मंत्रालय का कहना है कि इससे किसी भी संभावित खतरे का तेजी से जवाब देने की क्षमता मजबूत होगी।

किसी देश के खिलाफ नहीं है गठबंधन

सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि यह गठबंधन पूरी तरह रक्षात्मक है। इसका मकसद किसी विशेष देश को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंत्रालय का कहना है कि समुद्री व्यापार पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी देशों के हित में इन रास्तों को सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है।

ओमान और UAE ने क्यों बनाई दूरी?

हालांकि इस पहल में कई देशों ने रुचि दिखाई, लेकिन ओमान ने इसमें शामिल होने की सहमति नहीं दी। ओमान लंबे समय से तटस्थ विदेश नीति अपनाता रहा है और क्षेत्रीय विवादों में अक्सर मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। उसके ईरान और सऊदी अरब दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। यमन संघर्ष के दौरान भी ओमान ने सैन्य कार्रवाई की बजाय बातचीत और शांति प्रयासों पर अधिक जोर दिया।

Saudi Arabia Maritime Defence Alliance
सऊदी के गठबंधन से ओमान और UAE ने बनाई दूरी (AI जनरेटेड इमेज)

ओमान के अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी इस गठबंधन में शामिल होने का फैसला नहीं किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई पहले से अमेरिका, फ्रांस और अन्य सहयोगी देशों के साथ कई सुरक्षा और रक्षा व्यवस्थाओं का हिस्सा है। इसके अलावा सऊदी अरब और यूएई के बीच कुछ रणनीतिक मतभेद भी हैं, जिनके कारण अबू धाबी अपनी मौजूदा सुरक्षा नीति पर ही भरोसा बनाए रखना चाहता है।

बाब अल-मंदेब क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 10 से 12 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी भी इसी मार्ग से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचाई जाती है।

Saudi Arabia Maritime Defence Alliance
सऊदी अरब के तेल व्यापार के लिए अहम है बाब अल-मंदेब (AI जनरेटेड इमेज)

यह जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे हिस्से में केवल लगभग 29 किलोमीटर चौड़ा है। इसलिए यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि, हमले या नाकेबंदी का असर तुरंत वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है, जिससे परिवहन लागत और डिलीवरी का समय दोनों बढ़ जाते हैं।

सऊदी अरब के लिए क्यों जरूरी है यह मार्ग?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण सऊदी अरब अपने पूर्वी तेल क्षेत्रों से ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक तेल पहुंचा रहा है। इसके बाद निर्यात के लिए जहाजों को बाब अल-मंदेब से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में यदि इस मार्ग पर खतरा बढ़ता है तो सऊदी अरब के तेल निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।

Navbharat Live
navbharatlive.com