होर्मुज से पश्चिम तक… BRICS में भारत का सख्त संदेश, जानें क्या-क्या बोले विदेश मंत्री एस. जयशंकर

S Jaishankar BRICS Meeting: BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में एस. जयशंकर ने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद और एकतरफा प्रतिबंधों पर दुनिया को कड़ा संदेश दिया और संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग की।
From Hormuz to the West... India's Firm Message at BRICS: Find Out What External Affairs Minister S. Jaishankar Said
विदेश मंत्री एस. जयशंकर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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S Jaishankar BRICS Meeting Latest Update In Hindi: नई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक की शुरुआत करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया गहरे भू-राजनीतिक और आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे अस्थिर समय में, उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की उम्मीदें BRICS से काफी बढ़ गई हैं। जयशंकर ने साफ किया कि दुनिया की समस्याओं का समाधान केवल सैन्य शक्ति या प्रतिबंधों से संभव नहीं है।

होर्मुज और लाल सागर पर चिंता

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया की गंभीर स्थिति पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि इन समुद्री रास्तों में आने वाली बाधाएं और ऊर्जा ढांचे पर मंडराते खतरे पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि सुरक्षित और निर्बाध समुद्री प्रवाह आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है। यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।

गाजा संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता पर रुख

भारत ने बैठक के दौरान गाजा में जारी मानवीय संकट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि मानवीय संकट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और भारत ने वहां तुरंत सीजफायर, मानवीय पहुंच और दो राष्ट्र सिद्धांत के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

इसके अलावा, उन्होंने लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया को लेकर उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अस्थिरता अब केवल एक सीमित भौगोलिक मुद्दा नहीं रह गई है बल्कि इसका असर वैश्विक सुरक्षा पर पड़ रहा है।

brics foreign ministers
ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री

दबाव की राजनीति पर तीखा प्रहार

जयशंकर ने एकतरफा प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना करते हुए इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ बताया है। उनका तर्क है कि पश्चिमी देशों द्वारा अपनाई गई यह दबाव की राजनीति संवाद का सही विकल्प नहीं है और इन दंडात्मक उपायों का सबसे बुरा असर विकासशील देशों की प्रगति पर पड़ता है।

आतंकवाद और यूएन सुधार पर दो-टूक

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने अपना 'जीरो टॉलरेंस' का रुख बरकरार रखा। जयशंकर ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग को जोरदार ढंग से उठाया। उनका कहना था कि मौजूदा चुनौतियां साबित करती हैं कि बहुपक्षीय व्यवस्था कमजोर पड़ रही है और अब सुरक्षा परिषद में सुधार को और अधिक नहीं टाला जा सकता।

कूटनीति ही एकमात्र रास्ता

विदेश मंत्री के भाषण का साफ-साफ यही संदेश था कि दुनिया अब खंडित भू-राजनीति के दौर में है, जहां संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक दबाव एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं। भारत ने खुद को एक ऐसे वैश्विक खिलाड़ी के रूप में पेश किया है जो टकराव के बजाय संवाद और कूटनीति व्यवस्था को लेकर जोर देता है।

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