

Russia attacks on Ukraine: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर भयावह मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार तड़के रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर एक बड़ा और संगठित हवाई हमला किया। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, रूस ने 430 ड्रोन और 18 मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिनका निशाना मुख्य रूप से कीव के ऊंचे रिहायशी अपार्टमेंट और महत्वपूर्ण संरचनाएं थीं।
हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई बहुमंजिला इमारतों में बड़े छेद बन गए और आग फैल गई। विस्फोटों की गूंज पूरे शहर में सुनाई दी और रात का आकाश जलती आग से लाल हो गया। इस हमले में कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई और 35 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि यह हमला नागरिकों को अधिकतम नुकसान पहुंचाने की उद्देश्य से योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। उन्होंने जानकारी दी कि यूक्रेन ने अमेरिकी पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल कर 14 रूसी मिसाइलों को मार गिराया, लेकिन बाकी मिसाइलों और ड्रोन ने भारी नुकसान पहुंचाया। दक्षिण में ओडेसा और उत्तर-पूर्व में खार्किव भी इस हमले की चपेट में आए। ओडेसा क्षेत्र के चोर्नोमोर्स्क शहर में ड्रोन ने बाजार दिवस के दौरान एक व्यस्त सड़क पर हमला किया, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हुए, जिनमें 19 महीने की बच्ची भी शामिल है।
कीव में अजरबैजान के दूतावास भवन को एक इस्कंदर मिसाइल के मलबे से नुकसान हुआ। अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने इसे अस्वीकार्य करार दिया और चिंता जताई, क्योंकि अजरबैजान रूस और मध्य-पूर्व के व्यापार मार्ग में एक अहम कड़ी है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसका निशाना केवल यूक्रेन की सैन्य-औद्योगिक और ऊर्जा संरचनाएं थीं। उसने नागरिक क्षेत्रों पर हमले से इनकार किया, जबकि यूक्रेन का कहना है कि इस हमले में स्पष्ट रूप से आवासीय इमारतों को निशाना बनाया गया।
यूरोपीय देशों ने हमले की कड़ी निंदा की है। बर्लिन में यूरोपीय रक्षा अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक में यूक्रेन को सहायता जारी रखने का वादा किया गया। यूक्रेन के रक्षा मंत्री डेनिस शम्याल भी बैठक में वर्चुअली शामिल हुए और और उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों की मांग दोहराई।
यह हमला संकेत देता है कि सर्दियों के आगमन से पहले रूस फिर से यूक्रेन की बिजली और नागरिक बुनियादी ढांचे पर अधिक दबाव बनाना चाहता है। युद्ध के चार साल पूरे होने के बावजूद, कूटनीतिक प्रयास अब तक इस संघर्ष को रोकने में असफल रहे हैं।