भारत के बाद अब पाकिस्तान से दोस्ती बढ़ा रहा मॉस्को, शुरू होगा सीधा व्यापार (सोर्स-सोशल मीडिया)
The Russia Pakistan Strategic Partnership Expansion: रूस पाकिस्तान रणनीतिक साझेदारी विस्तार के तहत दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है। इस्तांबुल में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मॉस्को और इस्लामाबाद ने सीधी उड़ानों और जमीनी कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर सहमति जताई है। यह बदलाव न केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में भी एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। रूस अब पाकिस्तान के बुनियादी ढांचे और परिवहन क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी कर रहा है।
तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित ओआईसी (OIC) ट्रांसपोर्ट मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान और रूस के बीच यह महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस बैठक में पाकिस्तान के मंत्री अब्दुल अलीम खान और रूस के मंत्री दिमित्री स्टानिस्लावोविच जेवरेव ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक प्रगति के लिए सीधी कनेक्टिविटी का होना अनिवार्य है।
बैठक में बिना किसी देरी के मॉस्को और इस्लामाबाद के बीच सीधी फ्लाइट सेवा शुरू करने की आवश्यकता पर गंभीरता से विचार किया गया। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन में आने वाली वित्तीय अड़चनों को दूर करने के लिए बैंकिंग चैनलों को मजबूत करने की बात कही गई। वित्तीय रुकावटें दूर होने से दोनों देशों के व्यापारियों को माल की ढुलाई और भुगतान करने में काफी आसानी होगी।
रूस और पाकिस्तान अब ट्रकों के जरिए माल की ढुलाई को सुगम बनाने के लिए वीजा संबंधी जटिलताओं और अन्य मुद्दों को हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब्दुल अलीम खान ने कहा कि पाकिस्तान की रुचि चीन और अन्य मध्य एशियाई देशों के माध्यम से एक सुरक्षित लैंड कॉरिडोर बनाने में है। यह कॉरिडोर रूस तक पहुंचने के लिए एक असरदार और किफायती कनेक्टिविटी प्रदान करेगा जिससे समय की काफी बचत होगी।
रूस केवल व्यापार तक ही सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि वह पाकिस्तान के स्टील मिल्स और रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने में भी गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है। इन क्षेत्रों में निवेश से पाकिस्तान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिल सकती है और औद्योगिक विकास की गति तेज हो सकती है। पाकिस्तान की ओर से रूस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की भी कोशिशें जारी हैं जो वर्तमान में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
रूस और भारत के रिश्ते दशकों पुराने और भरोसेमंद रहे हैं जबकि पाकिस्तान पारंपरिक रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी खेमे का हिस्सा रहा है। हालिया महीनों में पुतिन और शहबाज शरीफ के बीच बढ़ती नजदीकियां यह संकेत देती हैं कि पुराने समीकरण अब क्षेत्र में तेजी से बदल रहे हैं। इस नई दोस्ती को चीन का भी समर्थन प्राप्त है जो इस क्षेत्र में अपने प्रभाव को और अधिक बढ़ाना चाहता है।
पाकिस्तान सरकार ने वादा किया है कि वह ट्रांसपोर्ट सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के लिए रूस के साथ मिलकर नए लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर विकसित करेगी। दिमित्री जेवरेव ने भी पाकिस्तान के साथ हाईवे कनेक्टिविटी बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर देते हुए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया है। यदि ये योजनाएं सफल होती हैं तो आने वाले वर्षों में मध्य और दक्षिण एशिया के बीच व्यापार की एक नई राह खुल जाएगी।
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फिलहाल दोनों देशों का मुख्य ध्यान रक्षा सहयोग के बजाय व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने पर केंद्रित है जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिल सके। बैंकिंग चैनलों की मजबूती और सीधी उड़ानों के शुरू होने से पर्यटन और बिजनेस ट्रैवल को भी काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। रूस की पाकिस्तान के प्रति यह नरम नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों के बीच गहरी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।