ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई (सोर्स- सोशल मीडिया)
Death of News Iran Supreme Leader Ayatollah Khamenei: पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त मध्य पूर्व पर टिकी हैं क्योंकि एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की एक हमले में मौत हो गई है। इस खबर की पुष्टि अब खुद ईरानी स्टेट मीडिया ने भी कर दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी हलचल मच गई है। हालांकि ईरान की सरकार ने अभी तक इस बेहद संवेदनशील मामले पर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है, जो रहस्य पैदा करती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी घटना को इतिहास के सबसे खतरनाक व्यक्ति का अंत करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साफ किया कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में खामेनेई को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया था। ट्रंप के इस आधिकारिक बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नए और अनिश्चित युग की शुरुआत की चर्चा होने लगी है।
हैरानी की बात यह है कि ईरान के सरकारी यानी स्टेट मीडिया ने भी अब इस खबर पर अपनी मुहर लगा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिनों के लंबे राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। इसके साथ ही पूरे देश में सात दिनों के सार्वजनिक अवकाश का भी ऐलान किया गया है ताकि लोग अपना दुख व्यक्त कर सकें।
Leader of the Islamic Revolution Ayatollah Seyyed Ali Khamenei was martyred in Israeli-American attack on Saturday. pic.twitter.com/dx80n47GoR — IRNA News Agency ☫ (@IrnaEnglish) March 1, 2026
यह हमला इजरायल और अमेरिका की वायु सेनाओं द्वारा एक बहुत ही बड़े और संयुक्त ऑपरेशन के तहत अंजाम दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, मिसाइल हमलों के दौरान खामेनेई के साथ कई अन्य शीर्ष ईरानी सैन्य कमांडर भी मारे गए हैं जिनकी सूची भी आई है। इस भीषण हमले ने न केवल ईरान की सैन्य शक्ति बल्कि उसके भविष्य के नेतृत्व को लेकर भी कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
भले ही स्टेट मीडिया और ट्रंप ने इसकी पुष्टि कर दी है, लेकिन अब भी ईरानी सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। खामेनेई के कार्यालय ने अभी तक इस खबर को लेकर कोई भी स्पष्ट खंडन या अधिकारिक जानकारी जनता के बीच साझा नहीं की है। सरकार की यह रहस्यमयी और लंबी चुप्पी दुनिया भर के कूटनीतिज्ञों के लिए भारी चिंता और संदेह का विषय बनी हुई है।
मध्य पूर्व के इस भीषण टकराव से भारत पर भी दबाव बढ़ गया है क्योंकि वहां तेल की आपूर्ति और व्यापार प्रभावित हो सकता है। भारत के लिए वहां रह रहे अपने हजारों नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है जिसे लेकर चर्चा जारी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्थिति को संभालने के लिए वैश्विक नेताओं से संपर्क साधा है ताकि भारतीयों को सुरक्षित रखा जा सके।
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इस खबर के फैलते ही वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही है जो चिंताजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई जैसे कद्दावर नेता का अचानक जाना पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है। आने वाले कुछ घंटे और दिन यह तय करेंगे कि खाड़ी क्षेत्र की राजनीति अब किस हिंसक या शांतिपूर्ण दिशा में रुख करेगी।