प्रिंस विलियम की पहली सऊदी अरब यात्रा: मोहम्मद बिन सलमान के साथ मुलाकात पर क्यों उठे सवाल?
William Saudi Tour: ब्रिटिश प्रिंस विलियम सरकार के अनुरोध पर पहली बार सऊदी अरब की यात्रा पर हैं। मानवाधिकारों और जमाल खशोगी हत्याकांड के साये में क्राउन प्रिंस सलमान से उनकी मुलाकात चर्चा में है।
- Written By: प्रिया सिंह
प्रिंस विलियम की मोहम्मद बिन सलमान के साथ मुलाकात पर क्यों उठे सवाल? (सोर्स-सोशल मीडिया)
Prince William Saudi Arabia Trip: ब्रिटेन के प्रिंस विलियम ब्रिटिश सरकार के विशेष अनुरोध पर पहली बार सऊदी अरब की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब सऊदी अरब अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने के लिए बड़े बदलावों से गुजर रहा है। यात्रा का मुख्य एजेंडा ऊर्जा के आदान-प्रदान और युवाओं के भविष्य पर केंद्रित है लेकिन इसे कूटनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। प्रिंस विलियम इस दौरे के दौरान सऊदी अरब के वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) से मुलाकात करेंगे।
यात्रा का मुख्य उद्देश्य
रॉयल पैलेस के सूत्रों का कहना है कि प्रिंस विलियम अपनी भूमिका को बहुत गंभीरता से लेते हैं और सरकार के अनुरोध को प्राथमिकता देते हैं। ब्रिटिश सरकार मोहम्मद बिन सलमान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए शाही परिवार के सदस्य को एक ‘गुप्त हथियार’ की तरह इस्तेमाल कर रही है। सऊदी अरब फिलहाल तेल पर निर्भरता कम करने के लिए मनोरंजन और खेल आयोजनों के माध्यम से अपनी छवि बदलने का प्रयास कर रहा है।
मानवाधिकारों पर विवाद
एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों का आरोप है कि सऊदी अरब खेलों और कॉमेडी शो का इस्तेमाल अपने खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड को छिपाने के लिए कर रहा है। प्रिंस विलियम को यात्रा से पहले वहां समलैंगिकता को अपराध मानने और राजनीतिक असहमति पर दी जाने वाली सजाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। हालांकि महिलाओं को 2018 में गाड़ी चलाने की अनुमति मिली है, फिर भी उन्हें पुरुषों की तुलना में कई कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है।
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खशोगी हत्याकांड का साया
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार मोहम्मद बिन सलमान ने 2018 में निर्वासित पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या या हिरासत को मंजूरी दी थी। सऊदी सरकार ने इन आरोपों को हमेशा खारिज किया है लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ता इस मुलाकात को नैतिकता के आधार पर गलत मान रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि प्रिंस विलियम का उस व्यक्ति से हाथ मिलाना अच्छा संदेश नहीं देता जिसे CIA ने हत्या का आदेश देने वाला माना था।
शाही परिवार के लिए चुनौती
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब जेफरी एपस्टीन की फाइलों के खुलासे से ब्रिटिश शाही परिवार को काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। एपस्टीन मामले के कारण प्रिंस एंड्रयू को अपना महल छोड़ना पड़ा है और शाही परिवार की वैश्विक छवि को गहरा नुकसान पहुंचा है। इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद प्रिंस विलियम कूटनीतिक संवेदनशीलता बनाए रखते हुए सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं।
ऐतिहासिक शाही संबंध
प्रिंस विलियम के पिता किंग चार्ल्स के सऊदी शाही परिवार के साथ पुराने और बहुत घनिष्ठ संबंध रहे हैं और उन्होंने कई यात्राएं की हैं। सऊदी अरब में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत के अनुसार किंग चार्ल्स को रेगिस्तान बहुत पसंद है और दोनों परिवारों के बीच एक विशेष जुड़ाव है। माना जा रहा है कि यह यात्रा दोनों शाही घरानों को और करीब लाएगी जिससे भविष्य में संवेदनशील मुद्दों को सुलझाना सरकार के लिए आसान होगा।
आलोचकों का कड़ा रुख
लंदन स्थित सऊदी आलोचक घनेम अल-मसरीर का कहना है कि प्रिंस के पास बातचीत का अवसर है लेकिन MBS के साथ खड़ा होना समझ से बाहर है। ब्रिटिश अदालत ने हाल ही में सऊदी अरब को अल-मसरीर के फोन हैक और उत्पीड़न के हर्जाने के रूप में 30 लाख पाउंड देने का आदेश दिया है। इसके बावजूद जो बाइडन और इमैनुएल मैक्रों जैसे कई विश्व नेता पहले ही मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात कर उनकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मान्यता दे चुके हैं।
