तीसरे वर्ल्ड वार की तैयारी तेज! जर्मनी को मिला इजरायल का साथ, चीन को कर देगा तबाह

Arrow 3 Missile Defence System: यूरोप में जंग के माहौल के बीच जर्मनी ने अपनी सुरक्षा बेहद मजबूत कर ली है। इजरायल ने जर्मनी को सबसे घातक मिसाइल डिफेंस सिस्टम Arrow-3 दिया है, जिसकी ताकत बेहिसाब है।
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Arrow 3 Missile Defence System। इमेज-सोशल मीडिया
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Arrow 3 Missile Range: यूरोप में जंग के माहौल के बीच जर्मनी ने अपनी सुरक्षा को बेहद मजबूत कर ली है। इधर, ताइवान के समर्थन को लेकर चीन के साथ जर्मनी का तनाव है। इस बीच इजरायल ने जर्मनी को अपना सबसे घातक मिसाइल डिफेंस सिस्टम Arrow-3 दिया है। यह सौदा 38 हजार करोड़ रुपये का है। जो इजरायल की अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील है। बर्लिन के पास इस सिस्टम की तैनाती शुरू हो गई है। साथ ही जर्मनी उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो अंतरिक्ष में दुश्मन की मिसाइलों को गिराने की ताकत रखते हैं। पहली बार इजरायल और अमेरिका के बाहर यह सिस्टम किसी और देश को मिला है।

Arrow-3 साधारण मिसाइल सिस्टम नहीं है। इसे किलर इन स्पेस कहा जाता है। दुनिया के अधिकतर डिफेंस सिस्टम दुश्मन की मिसाइल को तब मारते हैं, जब वह वायुमंडल में घुसती है, लेकिन Arrow-3 का काम करने का तरीका एकदम अलग है। यह सिस्टम दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर यानी अंतरिक्ष में ही खत्म कर देता है। मतलब कोई देश जर्मनी पर परमाणु बम भी गिराता है तो Arrow-3 उसे धरती से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में नष्ट कर देगा। इससे धरती पर रेडियोएक्टिव कचरा गिरने का खतरा नहीं के बराबर रहता है।

रफ्तार आवाज की गति से कई गुना अधिक

इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी स्पीड और रेंज है। Arrow-3 मिसाइलें हाइपरसोनिक स्पीड से उड़ती हैं। इनकी रफ्तार आवाज की गति से कई गुना अधिक होती है। इसकी मारक क्षमता 2,400 किलोमीटर तक है। मतलब यह दुश्मन के घर के ऊपर भी उसकी मिसाइल को तबाह कर सकती है। यह 100 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई पर जाकर टारगेट को हिट करती है। यह वह क्षेत्र है, जहां सामान्य डिफेंस सिस्टम काम नहीं करते हैं। इसकी स्पीड इतनी तेज है कि दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं मिलता। जैसे ही रडार को खतरे का पता चलता है, यह सिस्टम पलक झपकते एक्टिव हो जाता और अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरता है।

हिट-टू-किल तकनीक पर करता है काम

हिट-टू-किल तकनीक पर Arrow-3 काम करता है। इसका वारहेड किसी विस्फोटक से नहीं फटता, बल्कि सीधे जाकर दुश्मन की मिसाइल से टकराता है। यह टक्कर इतनी भयानक होती है कि दुश्मन की मिसाइल के परखच्चे उड़ जाते हैं। इसे काइनेटिक एनर्जी का इस्तेमाल करना कहते हैं। जब कोई बैलिस्टिक मिसाइल अंतरिक्ष से धरती की ओर लौट रही होती है तो उसकी स्पीड बहुत ज्यादा होती है। ऐसे में उसे निशाना बनाना गोली से गोली मारने जैसा है, लेकिन Arrow-3 के सेंसर इतने संवेदनशील हैं कि वे इस काम को बखूबी अंजाम देते हैं। इसका सीकर अंतरिक्ष के अंधेरे में भी शिकार ढूंढ लेता है।

लंबी दूरी की मिसाइलें रोकने में सक्षम नहीं था जर्मनी

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने पूरे यूरोप को डराया है। जर्मनी को डर था कि हालात बिगड़े तो वह बैलिस्टिक मिसाइलों का निशाना बन सकता है। जर्मनी के पास कम दूरी की सुरक्षा के लिए पैट्रियट सिस्टम था, पर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए कुछ नहीं था। Arrow-3 के आने से जर्मनी ने यूरोपियन स्काई शील्ड इनिशिएटिव (ESSI) के तहत अपनी सुरक्षा अभेद्य बना ली है। बर्लिन के पास इसकी तैनाती केवल शुरुआत है। भविष्य में इसे अन्य हिस्सों में लगाया जाएगा, ताकि पूरा देश सुरक्षित रहे। यह सिस्टम नाटो (NATO) की सुरक्षा छतरी को भी मजबूती देगा।

इजरायल ने इसी सिस्टम से खुद को बचाया

Arrow-3 को इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) और अमेरिका की बोइंग (Boeing) कंपनी ने मिलकर बनाया है। इसका मकसद ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों को रोकना था। 2017 में इजरायल ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए तैनात किया था। अब तक यह सिस्टम सिर्फ इजरायल के पास था। हाल में जब ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों मिसाइलें दागी थीं तो इसी सिस्टम ने इजरायल को बचाया था। उसको देखने के बाद जर्मनी ने इस डील को फाइनल करने में जरा भी देर नहीं की। अमेरिका ने भी इस डील को मंजूरी दे दी थी, क्योंकि इसमें अमेरिकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है।

रूस जैसे शक्तिशाली देश भी खौफ खाएंगे

मौजूदा समय में सबसे बड़ा खतरा परमाणु हमला है। कोई परमाणु मिसाइल फटती है तो तबाही मच जाती है, लेकिन Arrow-3 इस खतरे को जड़ से खत्म करता है। जब यह अंतरिक्ष में वारहेड को नष्ट करता है तो सारा मलबा वहीं राख हो जाता है। इससे लोगों को नुकसान नहीं होता। जर्मनी का यह कदम यूरोप में शक्ति संतुलन को बदल सकता है। अब जर्मनी के पास वह ताकत है, जिससे रूस जैसे शक्तिशाली देश खौफ खाएंगे। 4.6 बिलियन डॉलर की यह डील जर्मनी की सुरक्षा के आगे कुछ भी नहीं है। यह सौदा बताता है कि भविष्य की जंग जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान और अंतरिक्ष में लड़ी जाएगी।

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