ब्रिटेन चुनाव में पीएम मोदी की फोटो पर घमासान, ग्रीन पार्टी के वीडियो ने बढ़ाया तनाव

UK Election Controversy: ब्रिटेन उपचुनाव में पार्टी ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें पीएम मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए किया गया है, जिस पर विवाद खड़ा हो गया है।
Row Erupts in UK By-election over PM Modi Photo in Green Party's Urdu Campaign Video
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Green Party Urdu Campaign Video: ब्रिटेन में होने वाले आगामी उपचुनावों के बीच भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर को लेकर भारी राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड में प्रचार के दौरान ग्रीन पार्टी ने एक उर्दू भाषा का वीडियो जारी किया है जिसमें पीएम मोदी नजर आ रहे हैं। ग्रीन पार्टी उर्दू कैंपेन वीडियो के जरिए मुस्लिम और ब्रिटिश पाकिस्तानी वोटरों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। लेबर पार्टी ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे समाज को बांटने वाली और तनाव भड़काने वाली राजनीति करार दिया है।

विवाद की मुख्य वजह

ग्रीन पार्टी द्वारा जारी इस वीडियो में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर को पीएम मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ दिखाया गया है। वीडियो में गाजा युद्ध की भयावह तस्वीरें भी शामिल की गई हैं ताकि मतदाताओं की भावनाओं को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया जा सके। इस पूरे घटनाक्रम को गॉर्टन और डेंटन सीट पर मौजूद बड़ी संख्या में ब्रिटिश पाकिस्तानी वोटरों को लुभाने के पैंतरे के रूप में देखा जा रहा है।

वीडियो का विवादित संदेश

वीडियो में उर्दू वॉयसओवर के माध्यम से 'रिफॉर्म यूके' पार्टी पर समाज को तोड़ने और प्रवासियों पर भारी टैक्स लगाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें दावा किया गया है कि विपक्षी पार्टियां इस्लामोफोबिया को बढ़ावा दे रही हैं और ब्रिटेन में रहने वाले मुस्लिम परिवारों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही हैं। ग्रीन पार्टी ने खुद को रक्षक के तौर पर पेश करते हुए कहा है कि वे इन समुदायों की इज्जत और सुरक्षा को किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देंगे।

लेबर पार्टी का विरोध

लेबर पार्टी के भारतीय मूल के सांसद नवेंदु मिश्रा ने इस चुनावी हथकंडे को निंदनीय बताते हुए कहा कि राजनीति में नस्लवाद की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। मिश्रा ने चेतावनी दी कि विदेशी नेताओं की तस्वीरें दिखाकर ग्रीन पार्टी सामुदायिक तनाव को भड़काने का जोखिम उठा रही है जो समाज के लिए घातक है। उनके अनुसार वोट पाने के लिए की जा रही यह आइडेंटिटी पॉलिटिक्स ब्रिटिश समाज को केवल धर्म और जाति के आधार पर सीमित कर देगी।

चुनाव का समीकरण

मैनचेस्टर की गॉर्टन और डेंटन सीट पर फिलहाल लेबर, कंजर्वेटिव और ग्रीन पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। ये सभी दल धुर दक्षिणपंथी समूह 'रिफॉर्म यूके' के आप्रवासन विरोधी संदेशों का मुकाबला करने के लिए अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर का उपयोग इसी रणनीतिक खींचतान का एक हिस्सा माना जा रहा है जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।

सामाजिक प्रभाव और चिंताएं

इस वीडियो के सामने आने के बाद ब्रिटेन के भीतर रहने वाले भारतीय और पाकिस्तानी समुदायों के बीच आपसी सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी लाभ के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और विदेशी नेताओं को घसीटना लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की गरिमा को कम करता है। फिलहाल इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है और ग्रीन पार्टी की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगे की राह

ब्रिटिश चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों से इस विवादास्पद वीडियो की जांच करने और आचार संहिता के उल्लंघन पर कार्रवाई की मांग की गई है। मतदाताओं के बीच शिक्षा और जागरूकता फैलाने की जरूरत है ताकि वे पहचान आधारित राजनीति के जाल में न फंसकर विकास के मुद्दों पर वोट दें। आगामी उपचुनावों के नतीजे यह तय करेंगे कि ब्रिटेन की जनता इस प्रकार के विवादास्पद चुनावी प्रचार को किस तरह स्वीकार या नकारती है।

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