पीएम मोदी, शिगेरु इशिबा (फोटो- सोशल मीडिया)
PM Modi Japan Visit: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के संयुक्त अंतरिक्ष मिशन भारत और जापान के उद्योगों व स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को नई दिशा देंगे। यह बात पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जापान की राजधानी टोक्यो में कही।
जापानी अखबार द योमिउरी शिम्बुन को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन संयुक्त मिशनों से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के छाया वाले क्षेत्रों की गहन वैज्ञानिक समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। पीएम मोदी 29-30 अगस्त को जापान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। यह दौरा जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के निमंत्रण पर हो रहा है। यह मोदी का जापान का आठवां दौरा है।
उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत और जापान की सरकारों के बीच मजबूत साझेदारी ISRO और JAXA के बीच सहयोग की एक ऐसी संस्कृति बना रही है, जिसमें दोनों देशों के उद्योग और स्टार्टअप्स भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। इससे एक ऐसा इकोसिस्टम बन रहा है, जिसमें अनुसंधान से लेकर लॉन्च तक और प्रयोगशालाओं से लेकर वास्तविक जीवन में उपयोग तक नवाचार का प्रवाह हो रहा है।”
Addressing the joint press meet with PM Ishiba.@shigeruishiba https://t.co/84iLYW7lkT
— Narendra Modi (@narendramodi) August 29, 2025
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत और जापान मिलकर चंद्रयान श्रृंखला के अगले मिशन लूपेक्स (Lunar Polar Exploration) पर काम कर रहे हैं, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों की खोज को और आगे ले जाएगा।
लूपेक्स मिशन, जिसे चंद्रयान-5 भी कहा जा रहा है, ISRO और JAXA का संयुक्त प्रयास है, जिसे 2027-28 के दौरान जापान के एच3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में जापान का एक रोवर और भारत का एक लैंडर शामिल होगा, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में जल-बर्फ की खोज और उसका विश्लेषण करेगा।
प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि दोनों देशों की वैज्ञानिक टीमें मिलकर अंतरिक्ष विज्ञान के नए आयाम स्थापित करेंगी। उन्होंने कहा, “हमारी साझेदारी सिर्फ अंतरिक्ष में क्षितिज का विस्तार नहीं करेगी, बल्कि धरती पर मानव जीवन को भी बेहतर बनाएगी।”
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प्रधानमंत्री ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को “हमारे वैज्ञानिकों के संकल्प, परिश्रम और नवाचार की प्रेरक कहानी” बताया और कहा कि “अंतरिक्ष भारत के लिए अगला आयाम है।” उन्होंने कहा कि, भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि अंतरिक्ष अंतिम सीमा नहीं, बल्कि अगली चुनौती है।