राम मंदिर की जमीन पर बनेगी मस्जिद! भारत से हजारों किलोमीटर दूर मचा बवाल, सवालों के घेरे में इस देश की सरकार
UK Ram Mandir Dispute: ब्रिटेन के पीटरबरो में 40 साल पुराने राम मंदिर की जमीन UKIM को बेचने पर विवाद गहरा गया। हिंदू संगठन ने हाईकोर्ट का रुख किया, फिलहाल बिक्री पर स्टे है।
- Written By: अक्षय साहू
ब्रिटेन में राम मंदिर को लेकर विवाद (AI जेनरेटेड इमेज)
Bharat Hindu Samaj UKIM Court Case: भारत में हिंदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद हमेशा से ही संवेदनशील मामले रहे हैं। अयोध्या का राम मंदिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है जिसे लेकर देश में दंगे तक हुए। भारत में सड़क से लेकर संसद का सालों तक यह सवाल बना रहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा या फिर मस्जिद। इस विवाद का अंत 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुआ और अब अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर है।
एक ऐसा ही विवाद भारत से हजारों किलोमीटर दूर ब्रिटेन में उठा खड़ा हो गया है। जहां 40 साल पुराने राम मंदिर की जमीन पर अब मस्जिद बनाने की तैयारी चल रही है। हिंदू पक्ष का आरोप है कि इलाके में उनका एकलौटा मंदिर उनसे छीना जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि ब्रिटेन की सरकार इस पर लगातार नजर बनाए हुए है। आइए आपको बताते हैं कि पूरा विवाद क्या है? इसका अफ्रीका से क्या संबंध है?
क्या है पूरा विवाद?
मामला ब्रिटेन के पीटरबरो शहर का है। जहां लगभग चार दशक पुराने मंदिर की संपत्ति को लेकर विवाद अब गंभीर कानूनी रूप ले चुका है। यह मामला भारत हिंदू समाज (BHS) और यूके इस्लामिक मिशन (UKIM) के बीच है उस इमारत के स्वामित्व को लेकर है, जहां लंबे समय से हिंदू मंदिर संचालित हो रहा है। BHS ने पीटरबरो काउंसिल (नगर निगम) द्वारा मंदिर की जमीन को UKIM को बेचे जाने के फैसले को ब्रिटेन के हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने फिलहाल मामले पर स्टे लगा दिया है।
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अफ्रीकी देशों से आए हिंदुओं बनाया मंदिर
जानकारी के मुताबिक, पीटरबरो के जिस राम मंदिर की जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। इसकी स्थापना भारत हिंदू समाज (BHS) ने साल 1986 में की थी। BHS मे अधिकतर वो हिंदू परिवार हैं जो 1970 में युगांडा छोड़कर ब्रिटेन आए थे। 1970 के दशक में युगांडा पर ईदी अमीन का शासन था, जो एशियाई लोगों को अपने देश का दुश्मन मानता था। इसलिए उसने सत्ता संभालते ही एशियाई लोगों और खासकर भारतीयों को युगांडा छोड़ने का आदेश दिया। ईदी अमीन के फैसले के चलते 1970 के दशक में करीब 80 हजार भारतीय मूल के लोगों को युगांडा छोड़कर जाना पड़ा था। इनमें से कई लोग अमेरिका जाकर बसे, तो कई ब्रिटेन और यूरोप आए।
पीटरबरो स्थिति राम मंदिर (सोर्स- सोशल मीडिया)
इन्हीं में करीब 30 परिवारों ने पीटरबरो को अपना नया ठिकाना बनाया। हालांकि यहां पहले से ही कुछ भारती परिवार रह रहे थे, लेकिन अब युगांडा से 30 और परिवार और आकर रहने लगे, तो उन्होंने अपना एक मंदिर बनाने का प्लान बनाया। पीटरबरो के हिंदू परिवारों ने एक संस्था बनाई जिसका नाम उन्होंने भारत हिंदू समाज रखा। इसके बाद उन लोगों ने इलाके के एक खाली पड़े सरकारी स्कूल को सिटी काउंसिल से किराए पर लेकर वहां मंदिर की स्थापना की। इसके बाद यहां योग सेंटर खोला गया, बच्चों को भाषाएं सिखाई गई और हफ्ते में एक दिन यहां भंडारा भी कराया जाता है। यह सिलसिला 1986 के बाद से ही जारी है।
इस्लामिक संगठन को कैसे मिली जमीन
विवाद की शुरुआत तब हुई जब काउंसिल ने लगातार हो रहे वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए मंदिर की जमीन को बेचने का ऐलान किया। हालांकि काउंसिल ने BHS वादा किया था कि वो जब भी इस जमीन को बेचने का मन बनाएंगे सबसे पहले उन्हें बताएंगे और उन्ही को बेच देंगे। काउंसिल ने ऐसा किया भी, BHS ने इस संपत्ति को खरीदने के लिए 13 लाख पाउंड की बोली लगाई थी।
भारत हिंदू समाज के सदस्यों ने किया प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
हालांकि बाद में यूके इस्लामिक मिशन (UKIM) भी इस प्रक्रिया में शामिल हो गया। मिशन ने काउंसिल को ऑफर दिया कि वो किसी भी नकद प्रस्ताव से पांच प्रतिशत अधिक पैसा देने को तैयार है। इसके बाद फरवरी 2026 में परिषद ने यह संपत्ति लगभग 14 लाख पाउंड में UKIM को बेचने का फैसला किया। BHS ने इस डील को कोर्ट में चुनौती दी है।
हिंदू पक्ष ने कोर्ट में क्या कहा?
हाई कोर्ट में दोनों पक्षों ने दी दलील (AI जेनरेटेड इमेज)
BHS की ओर से हाई कोर्ट में दायर याचिका में हिंदू पक्ष ने मुख्य रूप से तीन दलीलें दी है।
पहला- काउंसिल ने पहले उन्हें संपत्ति बेचने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में अपना रुख बदल लिया।
दूसरा- यह फैसला ब्रिटेन के समानता अधिनियम 2010 के खिलाफ है क्योंकि इससे स्थानीय हिंदू समुदाय अपने एकमात्र धार्मिक स्थल खो सकते हैं।
तीसरा- BHS का तर्क है कि लंबे समय से मंदिर के रूप में उपयोग की जा रही पवित्र जगह को किसी अन्य धर्म के पूजा स्थल में परिवर्तित करने से समुदाय की धार्मिक भावनाएं प्रभावित होंगी।
वहीं दूसरी ओर, इस्लामिक मिशन का कहना है कि पीटरबरो में मुस्लिम आबादी लगातार बढ़ी है और वर्तमान धार्मिक और सामुदायिक सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। फिलहाल अदालत ने मामले में स्टे लगा दिया है और आखिरी फैसला आने तक स्थिति यथावत बनाए रखने का आदेश दिया है।
काउंसिल में अधिकतर मुस्लिम
पीटरबरो सिटी काउंसिल में फिलहाल लेबर पार्टी का प्रभाव है। काउंसिल के कई अहम पदों पर मुस्लिम समुदाय से आने वाले लोग काम कर रहे हैं। काउंसिल का नेतृत्व राजनीतिक नेता लेबर पार्टी की काउंसलर शबीना कय्यूम कर रही हैं। उनके अलावा मोहम्मद जमील के पास वित्त और कॉर्पोरेट प्रशासन, नुमान अली इकबाल को विकास और पुनर्विकास और जमीर अली को समुदाय और सार्वजनिक सुरक्षा का जिम्मा है।
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इसके चलते आरोप लग रहे हैं कि महत्वपूर्ण पदों पर मुस्लिम सदस्य होने के कारण इस्लामिक मिशन को जमीन बेची गई है। हालांकि काउंसिल ने किसी भी प्रकार के पक्षपात से इनकार किया है। काउंसलर शबीना कय्यूम ने हिंदू पक्ष को भरोसा दिलाया है कि वो मंदिर के लिए दूसरी जमीन उपलब्ध करवाएंगी। कय्यूम के अलावा दोनों पक्षों ने अपील की है कि मामले को धार्मिक एंगल न दिया जाए और इसे केवल कानूनी लड़ाई की तरह देखा जाए।
