

पाकिस्तानी मीडिया ‘डॉन’ में अभिजीत दीपके की हिरासत की खबर।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन।
छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा हिरासत के बाद रिहा।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप।
Pakistani Media Dawn Report On CJP Protest: भारत में ‘कॉकरोच आंदोलन’ के संस्थापक अभिजीत दिपके की हिरासत में लेने की खबर पाकिस्तानी मीडिया में भी चर्चा में रही। पाकिस्तानी मीडिया संस्थान डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित रैली से पहले शुक्रवार को दिपके को हिरासत में लिया गया था। शनिवार को कई भारतीय मीडिया संस्थानों ने उनकी गिरफ्तारी की खबर दी।
रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका के चलते दिपके को गिरफ्तार किया। उन्हें शनिवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना था। हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से इस मामले में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
‘कॉकरोच आंदोलन’ से जुड़े युवा कार्यकर्ता, विपक्षी समूह और छात्र संगठन इस महीने दिल्ली में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने किसी राजनीतिक दल का पक्ष लेने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटाए गए हैं, वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। भाजपा ने विपक्ष पर वैध चुनावी प्रक्रिया को लेकर गलत सवाल उठाने का आरोप लगाया है।
प्रदर्शन से जुड़ी छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा को भी शुक्रवार को हिरासत में लिया गया था। वह समर्थकों के साथ मध्य दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर रही थीं। शनिवार को रिहा होने के बाद उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई की जाए और एसआईआर प्रक्रिया रोकी जाए।
अभिजीत दिपके ने शुक्रवार को उन दो कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नेताओं के समर्थन में प्रदर्शन का आह्वान किया था, जिन्हें प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल पर विरोध करने के मामले में पांच दिन के लिए जेल भेजा गया था। पुलिस ने दिपके को प्रदर्शन से पहले चेतावनी भी दी थी।
इस आंदोलन ने पहले भी राजनीतिक हलकों में ध्यान खींचा था। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर आंदोलन समर्थकों के कई सप्ताह तक चले धरने के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था।