मदरसे बने आतंक की फैक्ट्री…आतंकियों का हब है पाकिस्तान, सीक्रेट रिपोर्ट ने खोली मुनीर की पोल
Delhi Blast: MI5 के अनुसार, पश्चिमी देशों में नाकाम साजिशों के 80% मामले स्थानीय जिहादियों से जुड़े थे, जिनका सीधे पाकिस्तान से संबंध नहीं था, लेकिन प्रशिक्षण पाकिस्तानी मदरसों में हुआ था।
- Written By: अक्षय साहू
पाकिस्तान बना आतंक की फैक्ट्री (सोर्स- सोशल मीडिया)
Pakistani Madrasas Helping Terrorists: ब्रिटेन की खुफिया और आंतरिक सुरक्षा एजेंसी MI5 का मुख्य मकसद देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आतंकवाद तथा गंभीर अपराधों से निपटना है। हाल ही में एजेंसी ने एक रिसर्च खुलासा किया कि पाकिस्तानी मदरसे और आतंकवादी प्रशिक्षण संस्थान वैश्विक आतंकवाद का एक बड़ा कारण है। उन्होंने कहा हाफिज सईद, मुल्ला उमर और मौलाना मसूद अजहर जैसे धर्मगुरु युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी खुफिया एजेंसियों द्वारा नाकाम की गई लगभग 80% आतंकवादी साजिशों में शामिल लोग मध्य पूर्व के नेटवर्क से सीधे जुड़े नहीं थे, बल्कि हिंसक जिहादी विचारधारा से प्रेरित स्थानीय लोग थे। यूरोप और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां अक्सर विदेश से आने वाले संदिग्धों पर ध्यान केंद्रित करती हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की मानसिकता और कट्टरपंथ की जड़ तक पहुँचने में उन्हें सफलता नहीं मिली।
युवाओं की हिंसा की मानसिकता का फायदा
रिसर्च में यह भी सामने आया कि हमास जैसे फिलिस्तीनी संगठन का समर्थन करने वाले लाखों लोग अमेरिका और यूरोप में प्रदर्शन करते हैं। इनमें युवा आंदोलन और मुस्लिम तथा फिलिस्तीनी संगठन शामिल हैं।
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इन आंदोलनों में हमास का विरोध नहीं दिखाई दिया। लंदन, पेरिस, मेड्रिड और म्यूनिख जैसे शहरों में ऐसे प्रदर्शन देखे गए। वहीं, अमेरिका और यूरोप में आईएसआईएस की स्लीपर सेल गतिविधियों पर खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं। उदाहरण के लिए, 2019 में श्रीलंका में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में शामिल आत्मघाती हमलावर ब्रिटेन में पढ़ा था और वहां से चरमपंथी नेटवर्क से जुड़ा था।
MI5 इन स्लीपर सेल नेटवर्क का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए सक्रिय है। आईएसआईएस की भर्ती रणनीति तीन चरणों पर आधारित है: नए सदस्यों को ढूंढना, उन्हें मॉनिटर करना और उनके विचारों को प्रभावित कर उन्हें आदेश पालन करने वाले आतंकियों में बदल देना। इसके तहत बच्चों और युवाओं को भी नफरत और हिंसा की मानसिकता में प्रशिक्षित किया जाता है।
सोशल मीडिया बना नया हथियार
आधुनिक तकनीकी माध्यम, जैसे सोशल मीडिया और सुरक्षित ऐप्स, आतंकवादी गतिविधियों को और आसान बना रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग युवाओं को प्रभावित करने और भर्ती करने के लिए किया जा रहा है। कट्टरपंथ अब केवल पूजा स्थलों या प्रशिक्षण शिविरों तक सीमित नहीं, बल्कि निजी बैठकों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में भी फैल रहा है।
आतंकवाद का हब बना पाकिस्तान
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व, मध्य एशिया और उप-सहारा अफ्रीका में आतंकवादी समूहों का विस्तार उन्हें पश्चिमी देशों में नेटवर्क बनाने और स्थानीय अपराध नेटवर्क के साथ सहयोग करने में मदद कर रहा है। पाकिस्तान के मदरसे और आतंकवादी प्रशिक्षण संस्थान वैश्विक आतंकवाद में योगदान दे रहे हैं। हाफिज सईद, मुल्ला उमर और मौलाना मसूद अजहर जैसे धर्मगुरु युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करते हैं।
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भारत में दिल्ली और लखनऊ में हुए आतंकवादी हमलों में उच्च शिक्षित युवाओं और जैश-ए-मोहम्मद की स्लीपर सेल का संबंध इसी वैश्विक कट्टरपंथी नेटवर्क से मिला। ये घटनाएँ केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक आतंकवाद का हिस्सा हैं।
