अरावली पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछे 5 सवाल, अपने ही फैसले पर लगाई रोक, सरकार को भेजा नोटिस
Aravalli Hills Controversy: अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर के अपने ही फैसले पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Supreme Court on Aravalli Case: अरावली पहाड़ी केस में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित राज्यों को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कुछ स्पष्टीकरण की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की परिभाषा में हुए बदलाव को लेकर उठे विवाद को लेकर स्वतः संज्ञान लिया था।
CJI सूर्यकांत ने अरावली पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘इस कोर्ट की रिपोर्ट या निर्देश को लागू करने से पहले एक निष्पक्ष और स्वतंत्र एक्सपर्ट की राय पर विचार किया जाना चाहिए. यह कदम पक्की गाइडेंस देने के लिए ज़रूरी है कि क्या अरावली पहाड़ियों और रेंज की परिभाषा से कोई स्ट्रक्चरल विरोधाभास पैदा होता है? यह तय किया जाना चाहिए कि क्या इससे गैर-अरावली इलाकों का दायरा उल्टा बढ़ गया है, जिससे बिना रोक-टोक के माइनिंग जारी रखने में आसानी हो रही है।’
अरावली पर सुप्रीम कोर्ट के 5 सवाल
- अरावली विवाद में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 5 सवाल फ्रेम किए हैं -:
- क्या अरावली की परिभाषा को केवल 500 मीटर के क्षेत्र तक सीमित करना एक ऐसा संरचनात्मक विरोधाभास पैदा करता है, जिससे संरक्षण का दायरा संकुचित हो जाता है?
- क्या इससे गैर-अरावली क्षेत्रों का दायरा बढ़ गया है, जहां नियंत्रित खनन की अनुमति दी जा सकती है?
- यदि दो अरावली क्षेत्र 100 मीटर या उससे अधिक के हों और उनके बीच 700 मीटर का अंतर (गैप) हो, तो क्या उस अंतर वाले क्षेत्र में नियंत्रित खनन की अनुमति दी जानी चाहिए?
- पर्यावरणीय निरंतरता (इकोलॉजिकल कंटिन्यूटी) को सुरक्षित कैसे रखा जाए?
- यदि नियमों में कोई बड़ा कानूनी या नियामक खालीपन सामने आता है, तो क्या अरावली पर्वतमाला की संरचनात्मक मजबूती बनाए रखने के लिए विस्तृत आकलन की आवश्यकता होगी?
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अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित राज्यों को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कुछ स्पष्टीकरण की जरूरत है। यह तय किया जाना चाहिए कि क्या इससे गैर-अरावली इलाकों का दायरा उल्टा बढ़ गया है, जिससे बिना रोक-टोक के माइनिंग जारी रखने में आसानी हो रही है। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।
