ईरान के खिलाफ जंग में शामिल हो सकता हैं सऊदी अरब-पाकिस्तान (सोर्स- सोशल मीडिया)
Pakistan Defence Pact Saudi Arabia: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को उनके महत्वपूर्ण तेल और गैस ठिकाने खाली करने की चेतावनी दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और तनाव फैल गया है। यह स्थिति तब शुरू हुई जब इजरायल ने ईरान के साउथ पर्स गैस फील्ड पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने कतर के गैस ठिकानों को निशाना बनाया।
सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि यूएई में एक गैस फील्ड को मलबे के कारण खाली कराना पड़ा। इसी बीच सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फरहान ने ईरान हमले को लेकर कहा कि तेहरान को अपने किए की सजा भुगतनी पड़ेगी और खाड़ी देश अपनी रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।
प्रिंस फैसल बिन फरहान के बाद इस बात की आशंका तेज हो गई है कि अगर सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर सीधा हमला हुआ, तो वह ईरान के खिलाफ युद्ध में पूरी ताकत से शामिल हो सकता है। इस स्थिति में पाकिस्तान भी इसमें शामिल हो सकता है, क्योंकि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर सऊदी अरब ने युद्ध में पूरी ताकत से भाग लिया, तो वह पाकिस्तान से सैन्य मदद की मांग कर सकता है, जिसमें परमाणु सुरक्षा भी शामिल हो सकती है। इसका मतलब यह होगा कि एक देश पर हमला, दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर सऊदी अरब का दौरा कर चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच नई रणनीतियां बन रही हैं।
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पाकिस्तान की स्थिति भी जटिल है। एक ओर वह सऊदी अरब का करीबी सहयोगी है, तो दूसरी ओर उसकी ऊर्जा की जरूरतें खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। साथ ही, पाकिस्तान ईरान के साथ एक गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है। अगर यह संघर्ष और बढ़ता है और सऊदी अरब युद्ध में शामिल होता है, तो यह सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। पाकिस्तान की एंट्री से यह संघर्ष और भी व्यापक हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।