पाकिस्तान पर कुदरत का कहर, गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ के बाद भूस्खलन, 9 लोगों की मौत, कई लापता
Pakistan News: पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित क्षेत्र में भूस्खलन से 9 लोगों की मौत हो गई। शीशपर ग्लेशियर की झील फटने से आई बाढ़ ने काराकोरम राजमार्ग और दर्जनों घरों को नुकसान पहुंचाया।
- Written By: अक्षय साहू
पाकिस्तान में बाढ़ के बाद भूस्खलन (फोटो- सोशल मीडिया)
Landslide in Pakistan: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित क्षेत्र में बाढ़ से क्षतिग्रस्त दरिया की मरम्मत के दौरान रविवार रात भयंकर भूस्खलन हो गया। दान्योर नाले पर काम कर रहे श्रमिकों पर भारी मात्रा में मिट्टी गिर गई, जिससे 9 लोगों की मौत हो गई और 3 अन्य घायल हो गए।
घटना के बाद स्थानीय अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया और बचाव अभियान तेजी से शुरू किया गया। अस्पताल प्रशासन ने 9 लोगों की मौत की पुष्टि की है। जबकि कई अन्य लोगों के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका जताई गई है।
चीन से जोड़ने वाले राजमार्ग को नुकसान
एक अलग घटना में, पिछले शुक्रवार को शीशपर ग्लेशियर से बनी झील का तटबंध टूटने के कारण अचानक बाढ़ आ गई। इस बाढ़ ने पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से अहम काराकोरम राजमार्ग के एक हिस्से को बहा दिया। पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ के अनुसार, बाढ़ ने सुरक्षात्मक दीवारों को नष्ट कर दिया और दर्जनों घरों और कृषि भूमि को खतरे में डाल दिया।
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अधिकारियों के अनुसार, यह बाढ़ 2018 के बाद से हसनाबाद दरिया में आई सबसे भीषण बाढ़ थी। इसने अलीबाद और आसपास के गांवों की सिंचाई एवं पेयजल आपूर्ति को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया और क्षेत्र का मुख्य सड़क संपर्क भी टूट गया। गिलगित-बाल्टिस्तान आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (GBDMA) के सहायक निदेशक जुबैर अहमद खान ने इस बाढ़ को क्षेत्र के लिए बेहद विनाशकारी बताया।
बाढ़ का प्रभाव गिलगित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। नगर खास में होपर वैली मार्ग अवरुद्ध हो गया, टोकोरकोट गांव में एक पुल बह गया, और शिमशाल घाटी में एकमात्र पहुंच मार्ग तथा तटबंध बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इसके चलते कई क्षेत्रों में हजारों लोग पीने के पानी और आवश्यक संसाधनों से वंचित हो गए हैं।
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ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का खतरा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष क्षेत्र में बार-बार चल रही हीटवेव और रिकॉर्डतोड़ तापमान के चलते ग्लेशियरों के पिघलने की गति तेज हो गई है। इसका नतीजा है कि इस तरह की बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं अब अधिक बार और तीव्रता से हो रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
