

Pakistan Inflation Rate Surge: पाकिस्तान में आर्थिक संकट के बीच महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ा दी हैं। ईंधन पर भारी टैक्स, परिवहन लागत में तेजी और गेहूं समेत खाद्य पदार्थों की किल्लत का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है। जुलाई में दहाई के आंकड़े से नीचे आने के बाद अगस्त में महंगाई दर फिर बढ़कर 11.2 प्रतिशत पहुंच गई। बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के घरेलू बजट को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ भारी करों का बोझ भी उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए विभिन्न शुल्कों ने ईंधन को महंगा बना दिया है।
देश में प्रति लीटर पेट्रोल पर 116 पाकिस्तानी रुपये और हाई-स्पीड डीजल पर 101 पाकिस्तानी रुपये का पेट्रोलियम लेवी, कार्बन लेवी और सीमा शुल्क लगाया जा रहा है। इसका असर परिवहन लागत पर साफ दिखाई दे रहा है।
पिछले साल की तुलना में मोटर ईंधन की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इसके चलते पाकिस्तान में परिवहन महंगाई दर 20.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे वस्तुओं की ढुलाई और रोजमर्रा की सेवाएं भी महंगी हो रही हैं।
ईंधन के साथ खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने पाकिस्तान की जनता के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। अगस्त के दौरान टमाटर की कीमतों में सालाना आधार पर 128 प्रतिशत और प्याज की कीमतों में 125 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इसके अलावा गेहूं की कीमत 87 प्रतिशत और आटे की कीमत 73 प्रतिशत तक बढ़ गई है। दूध और अन्य डेयरी उत्पादों के दाम भी करीब 10 प्रतिशत बढ़ने से परिवारों के मासिक खर्च में लगातार इजाफा हो रहा है।
जमाखोरी के खिलाफ सरकारी कार्रवाई के बावजूद बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने में सफलता नहीं मिली है। इससे कृत्रिम कमी और आपूर्ति संकट की समस्या और गंभीर होती जा रही है।
पाकिस्तान सरकार ने इस वर्ष 29.7 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का दावा किया था, लेकिन प्रांतीय स्तर पर खरीद और प्रबंधन की समस्याओं ने खाद्यान्न संकट को बढ़ा दिया। सिंध और पंजाब सरकारें गेहूं खरीद के अपने निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरे नहीं कर सकीं।
स्थिति को संभालने और घरेलू बाजार में गेहूं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए संघीय सरकार ने अब एक मिलियन टन गेहूं विदेशों से आयात करने का फैसला किया है।
महंगाई का असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। शहरी क्षेत्रों में गैर-खाद्य महंगाई दर 9.4 प्रतिशत पहुंच गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 11.3 प्रतिशत दर्ज की गई है।
पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई सरकार के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन गई है। ईंधन, खाद्यान्न और परिवहन की लागत बढ़ने से आम परिवारों की क्रय शक्ति कमजोर हो रही है। गेहूं संकट और आयात की जरूरत ने सरकारी वित्तीय दबाव भी बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन पर करों और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले महीनों में महंगाई आम लोगों के लिए और गंभीर समस्या बन सकती है।
पाकिस्तान में ईंधन पर भारी टैक्स और गेहूं की किल्लत से अगस्त में महंगाई दर बढ़कर 11.2 प्रतिशत पहुंच गई। टमाटर, प्याज, गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है।