इमरान खान की PTI के बाद अब MQM पर गिरी गाज, PAK आर्मी ने छीनी बड़े नेताओं की सुरक्षा, क्या है बड़ी वजह?

Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान में राजनीतिक संकट गहराया! इमरान खान की पीटीआई के बाद अब MQM सेना के निशाने पर है। बड़े नेताओं की सुरक्षा हटने से हड़कंप मच गया है।
After Imran Khan's PTI, the MQM is now facing the heat; the Pakistan Army has withdrawn security from its top leaders. What is the main reason?
आसीम मुनीर और इमरान खान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Pakistan News In Hindi: पाकिस्तान की सियासत में उथल-पुथल और अनिश्चितता का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के खिलाफ चली लंबी कार्रवाई के बाद, अब पाकिस्तान की एक और बड़ी राजनीतिक ताकत, मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) पाकिस्तान, कथित तौर पर सेना के रडार पर आ गई है।

ताजा घटनाक्रम में MQM के कई शीर्ष नेताओं, मंत्रियों और विधायकों की सुरक्षा अचानक वापस ले ली गई है जिससे देश के राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।

इन दिग्गजों की सुरक्षा में हुई कटौती

प्राप्त जानकारी और सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा हटाने का यह फैसला बेहद गोपनीय तरीके से लिया गया। जिन प्रमुख नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई है, उनमें संघीय मंत्री खालिद मकबूल सिद्दीकी, वरिष्ठ नेता फारूक सत्तार, मुस्तफा कमाल और अनीस कायमखानी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इतना ही नहीं, सिंध विधानसभा में एमक्यूएम के विपक्षी नेता अली खुर्शीदी की सुरक्षा भी बिना किसी पूर्व सूचना के हटा ली गई है। पार्टी नेतृत्व ने इस कदम को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में देखा है।

क्या है सुरक्षा हटाने के पीछे का कनेक्शन?

राजनीतिक विशेषज्ञों और सूत्रों का मानना है कि सुरक्षा हटाने का यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। पिछले कुछ समय से कराची के गुल प्लाजा हादसे को लेकर एमक्यूएम लगातार सरकारी तंत्र और सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही थी। पार्टी इस मामले में सरकारी तंत्र की विफलता की कड़ी आलोचना कर रही थी। एमक्यूएम के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि इसी आलोचना और गुल प्लाजा घटना पर मुखर होकर सवाल उठाना ही शायद इस दंडात्मक कार्रवाई की मुख्य वजह है।

लोकतंत्र और सिविल-मिलिट्री तनाव

इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान में बढ़ते सिविल-मिलिट्री तनाव के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पहले PTI के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अब MQM नेताओं की सुरक्षा हटाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पाकिस्तान में असहमति की आवाजों के लिए जगह कम होती जा रही है। एमक्यूएम ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के दबाव या डर के आगे नहीं झुकेगी और जनता के मुद्दों पर सवाल उठाती रहेगी।

आर-पार की लड़ाई के मूड में एमक्यूएम

सुरक्षा हटाए जाने के बाद एमक्यूएम नेतृत्व ने एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का फैसला किया है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी न केवल सुरक्षा हटाने के फैसले की सार्वजनिक रूप से निंदा करेगी, बल्कि इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक स्वतंत्रता पर एक बड़े हमले के रूप में पेश करने की तैयारी में है। पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में एमक्यूएम और सत्ता प्रतिष्ठान के बीच टकराव और बढ़ सकता है।

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