बिना शोर मुनीर ने किया तख्तापलट…शहबाज के सिर पर तैनात किया एजेंट, सांस लेने की भी रखते हैं खबर
Silent Coup in Pakistan: फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तख्तापलट से बचते हुए इमरान खान को बाहर किया, शहबाज शरीफ और आसिफ मलिक को प्रमुख पदों पर नियुक्त किया, सेना-सिविल नियंत्रण मजबूत किया।
- Written By: अक्षय साहू
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Asim Munir Stages Coup in Pakistan: पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों से यह चर्चा थी कि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तख्तापलट की योजना बना रहे थे, लेकिन उन्होंने इसे अंतिम रूप नहीं दिया। उनका मानना था कि यदि ऐसा कदम उठाया गया, तो अंतरराष्ट्रीय दबाव में वृद्धि हो सकती है। जनरल मुशर्रफ के दौर में जब उन्होंने नवाज शरीफ की सरकार को गिराया था, तब भी लोकतंत्र बहाल करने का दबाव था। मुनीर ने उस अनुभव से सीखते हुए यह तय किया कि तख्तापलट के बिना ही वे देश के नियंत्रण में रहेंगे।
मुनीर ने इमरान खान को सत्ता से बाहर किया और जेल भेजा, क्योंकि उन्हें उनसे सबसे बड़ा खतरा महसूस हो रहा था। इसके बाद उन्होंने आसिफ अली जरदारी को राष्ट्रपति और शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री बनाया, जो अब उनके इशारों पर काम कर रहे हैं। साथ ही, मुनीर ने अपने करीबी अफसर जनरल आसिफ मलिक को ISI प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया। इस प्रकार, मुनीर ने मिलिट्री और सिविल दोनों क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ बनाई।
पीएम ऑफिस में भतीजे की तैनाती
मुनीर ने अपने भतीजे, कैप्टन सैयद अबू रहमान बिन कासिम को सेना से निकालकर सिविल सर्विस में भेज दिया। इसके बाद, 9 और सेना के अधिकारियों को सिविल प्रशासन में तैनात किया गया है। भतीजे को प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात करने का मकसद शहबाज शरीफ की गतिविधियों पर निगरानी रखना है।
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जानकारी के मुताबिक, मुनीर अब अपने भरोसेमंद लोगों को गृह मंत्रालय, उच्च कमीशन और दूतावासों में भेजने का विचार कर रहे हैं, ताकि विदेशों में भी उनकी पकड़ मजबूत हो। बताया जा कहा है कि मुनीर की असुरक्षा की भावना गहरी हो गई है, और उन्होंने खुद को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत करवाया है। सेना के भीतर TTP, BLA और अफगान तालिबान से नाकामियों की वजह से असंतोष बढ़ा है, खासकर खैबर पख्तूनख्वा में।
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शहबाज सरकार से तनाव
इसके अलाव मुनीर और सरकार के बीच तनाव भी बढ़ा है, क्योंकि वे अपना कार्यकाल 2030 तक बढ़वाना चाहते हैं, जबकि सरकार ने 2027 तक की सीमा रखी है। मुनीर ने कई कोर कमांडरों को बदलकर अपनी स्थिति मजबूत की है, जिससे यह साफ है कि वह पाकिस्तान की सत्ता के हर क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहते हैं।
