शहबाज को सता रहा डर! तालिबान से जंग के बीच अचानक पहुंचे आर्मी हेडक्वार्टर, अधिकारियों से की सीक्रेट मींटिंग

PaK-Afghanistan War: शहबाज शरीफ ने रावलपिंडी में सेना मुख्यालय में अफगान सीमा पर हालिया झड़पों का जायजा लिया, TTP और तालिबान गठजोड़ को बर्दाश्त न करने और जवाबी कार्रवाई की छूट दी।
Shehbaz Sharif Visits Army Headquarters
शहबाज शरीफ (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Shehbaz Sharif Visits Army Headquarters: पाकिस्तान और अफगानिस्ता के बीच तनाव अपने चरम है, दोनों पिछले 48 घंटे से एक दूसरे पर बम के गोले बरसा रहे हैं। इसी बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शुक्रवार को रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्हें अफगानिस्तान के साथ जारी सीमा तनाव और हालिया झड़पों पर विस्तृत जानकारी दी गई। 

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में हमलों को विफल करने और प्रभावी जवाबी कार्रवाई करने में पाकिस्तानी सेना की पेशेवर क्षमता और तत्परता की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए सरकार और सेना पूरी तरह एकजुट हैं।

ख्वाजा आसिफ ने दी तालिबान को धमकी

इस बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्थिति को “खुली लड़ाई” की संज्ञा दी। उनका कहना है कि अक्टूबर में कतर की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद से अब तक की यह सबसे बड़ी और खतरनाक झड़प है। हालिया घटनाओं ने दोनों देशों के संबंधों में पहले से मौजूद अविश्वास को और गहरा कर दिया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों का इतिहास लंबा और जटिल रहा है, जो 1947 में पाकिस्तान के गठन से शुरू होता है। सांस्कृतिक, जातीय और आर्थिक जुड़ाव के बावजूद सीमा विवाद, उग्रवाद और सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने संबंधों को अक्सर तनावपूर्ण बनाए रखा है। पिछले कुछ महीनों में सीमा पर कई छोटे संघर्ष हुए, लेकिन ताज़ा टकराव को अब तक का सबसे गंभीर माना जा रहा है।

तालिबान-TTP का रिश्ता मंजूर नहीं

27 फरवरी को हुई उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री को सीमा पर बढ़ते तनाव, सैन्य रणनीति और जवाबी अभियानों की विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक के बाद जारी बयान में शहबाज शरीफ ने स्पष्ट किया कि ‘फिटना अल-खवारिज’ यानी टीटीपी और अफगान तालिबान के बीच किसी भी प्रकार के गठजोड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के खिलाफ किसी भी खतरे का निर्णायक जवाब देगा।

सेना को मुंहतोड़ जवाब देने की छूट

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सेना को किसी भी उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी छूट है। दूसरी ओर, भीषण गोलाबारी के बाद तालिबान की ओर से बातचीत के संकेत दिए गए हैं। हालांकि, इस तनावपूर्ण स्थिति में दोनों देशों के सामने चुनौती यह है कि वे कूटनीतिक प्रयासों और संवाद के माध्यम से स्थायी समाधान तलाशें, ताकि क्षेत्र में स्थिरता और शांति कायम रह सके।

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