अमेरिका में ट्रंप की युद्ध के विरोध में प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Protests Against Trump in US Cities: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। हर दिन स्थिति और गंभीर होती जा रही है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान भी इजरायल और खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है। एक ओर पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है, वहीं अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध नीति को लेकर आलोचना तेज हो गई है। इसके विरोध में लोगों ने ‘नो किंग्स’ प्रदर्शन आयोजित किए।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को अमेरिका के कई शहरों में भारी भीड़ ने ‘नो किंग्स’ प्रदर्शनों में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप की नीतियों, बढ़ती महंगाई और ईरान के साथ जारी संघर्ष के खिलाफ आवाज उठाई।
ये प्रदर्शन पूरे देश में हुए। बड़े शहरों में बड़े मार्च हुए, जबकि उपनगरीय और ग्रामीण इलाकों में छोटे समूह इकट्ठा हुए। ये कार्यक्रम रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों तरह के राज्यों में आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे, तख्तियां दिखा रहे थे और गायन-नृत्य जैसी सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग ले रहे थे।
न्यूयॉर्क शहर में प्रदर्शनकारियों ने मिडटाउन मैनहट्टन से मार्च किया और इमिग्रेशन नीतियों, ट्रंप प्रशासन और ईरान के साथ युद्ध के खिलाफ बैनर लहराए। वहीं, सैन फ्रांसिस्को के एम्बार्केडेरो प्लाजा में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और सिविक सेंटर की ओर मार्च किया। उन्होंने अमेरिकी झंडे और यूक्रेन तथा ट्रांसजेंडर अधिकारों सहित विभिन्न मुद्दों का समर्थन करने वाले बैनर भी उठाए।
सेंट पॉल, मिनेसोटा में एक बड़ी रैली आयोजित की गई, जिसमें रॉक लीजेंड ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने भी प्रस्तुति दी। उन्होंने मिनेसोटा को पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया और इस साल जनवरी में संघीय आव्रजन एजेंटों द्वारा हत्या किए गए एलेक्स प्रीटी और रेनी गुड को श्रद्धांजलि दी।
स्प्रिंगस्टीन ने कहा कि अमेरिकी शहरों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और लोगों की प्रतिबद्धता ने साबित किया कि यह अभी भी अमेरिका है। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज़ ने भी संघीय इमिग्रेशन नीतियों की कड़ी आलोचना की और स्थानीय समुदायों द्वारा खड़े होने की सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि जब व्हाइट हाउस में बैठे तानाशाह बनने की कोशिश कर रहे व्यक्ति ने अपने अप्रशिक्षित, आक्रामक अधिकारियों को मिनेसोटा भेजा, तो वहीं के नागरिकों ने अपने पड़ोसियों, शालीनता और दयालुता के लिए आवाज उठाई। सीएनएन ने बताया कि ये ‘नो किंग्स’ विरोध प्रदर्शनों की तीसरी लहर है, पिछले साल हुए दो बड़े आयोजनों के बाद।
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विरोध प्रदर्शन आर्थिक चुनौतियों, जैसे ईंधन की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में युद्ध से जुड़ी धीमी अर्थव्यवस्था के मुद्दों के बीच हो रहे हैं। फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में ट्रंपके लगभग 50 समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच मौखिक झड़प हुई। हालांकि, अधिकांश विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और सरकार की नीतियों व आर्थिक मुद्दों पर जनता के असंतोष को प्रदर्शित किया।