क्या ईरान पर हमला करेगा इजराइल? डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजरें
Netanyahu Trump Meeting: इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू 29 दिसंबर को ट्रंप से मुलाकात करेंगे। इस दौरान ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु खतरे पर चर्चा होगी, जिससे युद्ध की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
- Written By: प्रिया सिंह
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई (सोर्स-सोशल मीडिया)
Iran Ballistic Missile Threat 2025: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगामी मुलाकात ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह महत्वपूर्ण बैठक 29 दिसंबर को फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में होने जा रही है, जहां ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गंभीर मंथन होगा।
इजराइल को डर है कि ईरान अपनी सैन्य शक्ति को फिर से संगठित कर रहा है, जो भविष्य में एक बड़े संकट का कारण बन सकता है। इस मुलाकात के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या इजराइल आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ किसी बड़ी सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनेगा।
नेतन्याहू और ट्रंप की मुलाकात का मुख्य एजेंडा
एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नेतन्याहू इस बैठक में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों को लेकर खुफिया जानकारी साझा करेंगे। इजराइली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान अपनी मिसाइल उत्पादन क्षमताओं का तेजी से पुनर्निर्माण कर रहा है।
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नेतन्याहू का मुख्य उद्देश्य ट्रंप को यह समझाना है कि अगर ईरान के इस बढ़ते कार्यक्रम को अभी नहीं रोका गया, तो इजराइल के पास सैन्य हमला करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच भविष्य की रक्षा रणनीति को एक नई दिशा दे सकती है।
ईरान का मिसाइल कार्यक्रम बना बड़ी चुनौती
इजराइली खुफिया सूत्रों का दावा है कि ईरान हर महीने करीब 3,000 बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन का लक्ष्य रख रहा है। यह संख्या न केवल इजराइल बल्कि पूरे क्षेत्र में अमेरिकी हितों के लिए भी एक बड़ा खतरा है।
इजराइल को चिंता है कि ईरान ने पिछले हमलों में क्षतिग्रस्त हुए अपने परमाणु ढांचे को भी गुपचुप तरीके से बहाल करना शुरू कर दिया है। अगर ईरान इसी गति से अपनी मिसाइल शक्ति बढ़ाता रहा, तो वह कम समय में परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें तैयार कर सकता है।
व्हाइट हाउस का रुख और ‘मिडनाइट हैमर’
ईरान के खतरों के बीच व्हाइट हाउस ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली के अनुसार, जून में अमेरिका द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ ने ईरान की परमाणु क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया था।
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका की कार्रवाई सफल रही थी। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि वे ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार बनाने की सीमा तक पहुंचने नहीं देंगे और जरूरत पड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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क्या फिर से छिड़ेगा ईरान-इजराइल युद्ध?
इस साल की शुरुआत में ईरान और इजराइल के बीच करीब दो हफ्तों तक सीधा संघर्ष चला था, जिसमें दोनों ओर से मिसाइल हमले हुए थे। इजराइल फिलहाल किसी नए हमले की घोषणा नहीं कर रहा है, लेकिन नेतन्याहू के सख्त तेवर बताते हैं कि वे अमेरिकी समर्थन के साथ एक नई योजना बना रहे हैं।
अगर कूटनीतिक दबाव काम नहीं करता है, तो इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए ईरान के मिसाइल ठिकानों पर दोबारा बमबारी कर सकता है। 29 दिसंबर की बैठक के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या महायुद्ध की ओर।
