धार्मिक जुलूस पर विवाद से सुलग उठा नेपाल, छह से ज्यादा शहरों में लगाया गया कर्फ्यू, तीन की मौत से भड़के लोग

Nepal Violence Curfew: नेपाल के सुनसरी में दो समुदायों की हिंसक झड़प के बाद सिराहा और सुनसरी जिलों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है। स्थिति को देखते हुए PM बालेन्द्र शाह ने NSC बैठक बुलाई।
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धार्मिक जुलूस पर विवाद से सुलग उठा नेपाल(Image- Social Media)
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Nepal Violence: नेपाल के सुनसरी जिले के कप्तानगंज इलाके में दो समुदायों के बीच झड़प के बाद माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है। हिंसा दक्षिणी मधेस प्रांत के दूसरे हिस्सों में फैलने के खतरे को देखते हुए, सिराहा जिला प्रशासन कार्यालय (डीएओ) ने गुरुवार को जिले के कुछ हिस्सों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया। सुनसरी के कुछ हिस्सों में लगाया गया कर्फ्यू भी गुरुवार को जारी रहा। सुनसरी और सिराहा दोनों की सीमा भारत के बिहार राज्य से लगती है।

सिराहा के मुख्य जिला अधिकारी सुरेंद्र पौडेल ने गुरुवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजे से अगले आदेश तक कर्फ्यू का आदेश जारी किया। नोटिस के अनुसार, प्रशासन को आशंका है कि शांति व्यवस्था में खलल डाला जा सकता है और दंगे या विरोध प्रदर्शन बढ़ सकता है इसलिए हाल की सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के बाद जिला सुरक्षा समिति ने इन इलाकों में कर्फ्यू लगाने का आदेश जारी किया है।

कई जिलों में लगाया गया कर्फ्यू

प्रशासनिक आदेश के अनुसार, कर्फ्यू का दायरा पूर्व-पश्चिम राजमार्ग के पूर्वी हिस्से में गोलबाजार नगरपालिका-3 के कसाहा खोला से लेकर पश्चिम में चोहरवा चौक तक फैला है। यह उत्तर में सैनिक चौक से लेकर दक्षिण में रामप्रताप रामप्रसाद तमांग जनता मल्टीपल कैंपस के आसपास के इलाके तक भी फैला हुआ है। प्रशासन ने चेतावनी दी कि कर्फ्यू आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हिंसा रविवार (26 जुलाई) देर रात देवगंज ग्राम पंचायत के कप्तानगंज इलाके में शुरू हुई। यहां दो समुदाय अपने अपने धार्मिक कार्यक्रम को लेकर आपस में उलझ गए। सोमवार को सप्तकोशी नदी की ओर जाने वाला 'बोलबम तीर्थयात्रा का जुलूस निकाला जा रहा था तो दूसरी तरफ भी दूसरा समुदाय अपने धार्मिक कार्यक्रम में व्यस्त। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, विवाद मुख्य रूप से लाउडस्पीकर की तेज आवाज, धार्मिक झंडे लगाने को लेकर शुरू हुआ था। एक समूह ने नॉइज पॉल्यूशन का हवाला दे तेज संगीत पर ऐतराज जताया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई।

दो समुदाय में हिंसक झड़प

कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। दोनों के बीच पथराव और मारपीट शुरू हो गई। इसके बाद पूरे इलाके में तोड़फोड़ और आगजनी की घटानाएं हुईं। हालात बिगड़ते देख सुरक्षा बलों ने दखल दिया। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जब भीड़ ने तोड़फोड़ और आगजनी जारी रखी, तो सुरक्षा बलों को गोली चलानी पड़ी। इसी गोलीबारी में 24 साल का एक युवक मारा गया। इसके बाद से ही तनाव और बढ़ गया। हिंसक विरोध प्रदर्शन में कुछ सुरक्षाकर्मी भी चोटिल हुए हैं।

हालांकि पुलिस का मानना ​​है कि सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है। मधेस प्रांत पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रभु प्रसाद ढकाल ने आईएएनएस को बताया, "हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं, इसलिए कर्फ्यू जारी है।"

हिंसा से प्रभावित इलाके

सुनसरी में कर्फ्यू इनरुवा नगर पालिका, दुहाबी नगर पालिका, भोक्राहा नरसिंह ग्रामीण नगर पालिका, कोशी ग्रामीण नगर पालिका, गढ़ी ग्रामीण नगर पालिका, देवानगंज ग्रामीण नगर पालिका, हरिनगर ग्रामीण नगर पालिका और बरजू ग्रामीण नगर पालिका के पूरे इलाकों में लागू है।

इताहरी उप-महानगर शहर में, महेंद्र राजमार्ग के दोनों ओर 200 मीटर के दायरे में वार्ड 16 और 17 पर प्रतिबंध लागू हैं। रामधुनी नगर पालिका में, राजमार्ग के किनारे इसी 200 मीटर के दायरे में वार्ड 1 और 5 में कर्फ्यू लागू है।

सरकार ने उठाया बड़ा कदम

इस बीच, गुरुवार को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) की बैठक हुई। इसमें सुनसरी में हालिया हिंसा सहित नेपाल की समग्र सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई और सामाजिक सद्भाव व राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच तालमेल को मजबूत करने का निर्णय लिया गया।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, परिषद ने देश के समग्र सुरक्षा माहौल का आकलन किया और शांति, सामाजिक सद्भाव व राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित पक्षों के बीच तालमेल बढ़ाने का संकल्प लिया।

इस बीच, कांतिपुर दैनिक ने सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) द्वारा तीन साल पहले सरकार को सौंपी गई एक गोपनीय रिपोर्ट का हवाला देते हुए खबर दी है कि एपीएफ ने तराई क्षेत्र में धार्मिक और जातीय विभाजन पैदा करने की संगठित कोशिशों के बारे में पहले ही चेतावनी दी थी। रिपोर्ट में तत्काल राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप की सिफारिश की गई थी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि देश के नेतृत्व ने उनकी रिपोर्ट को नजरअंदाज किया।

-एजेंसी इनपुट के साथ

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