नेपाल में पांच महीने पहले मिली थी चेतावनी, फिर भी क्यों नहीं बचाई गईं जिंदगियां?

Nepal Glacier Lake: नेपाल में 5 महीने पहले मिली ग्लेशियल झील फटने की चेतावनी को नजरअंदाज करने से अचानक आई भयानक बाढ़ में 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और बहुत भारी तबाही मच गई है।
Nepal Glacier Lake Outburst Danger
नेपाल में आई भीषण बाढ़(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Nepal Glacier Lake Outburst Danger: नेपाल में तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के बड़े हिमस्खलन के कारण अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक हादसे में अब तक लगभग 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1500 लोग अभी भी लापता हैं।

काठमांडू स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्थान इसिमोड (ICIMOD) ने करीब पांच महीने पहले ही इस विनाशकारी आपदा को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की थी। संस्थान ने बताया था कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय के ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे ग्लेशियर झीलों के फटने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

ग्लेशियरों की मोटाई में भारी कमी और टिपिंग पॉइंट

इसिमोड की दो महत्वपूर्ण रिपोर्टों के अनुसार, साल 2000 के बाद से ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार दुनिया के अधिकांश हिस्सों में दोगुनी हो चुकी है। अध्ययन से पता चला है कि वर्ष 1975 से अब तक ग्लेशियर की बर्फ की मोटाई में लगभग 27 मीटर की भारी कमी आई है।

इसके अलावा, हिंदू कुश हिमालय के 38 ग्लेशियरों के विश्लेषण से वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ये ग्लेशियर वापस न लौटने वाले खतरनाक मोड़ पर पहुंच रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से केवल सात ग्लेशियर ही वर्ल्ड ग्लेशियर मॉनिटरिंग सर्विस (WGMS) के वैश्विक मानकों को पूरा करते हैं।

अचानक आई प्रलयंकारी बाढ़ की मुख्य वजह और तबाही

इस भयानक बाढ़ का मुख्य कारण तिब्बत सीमा के पास एक विशाल हिमस्खलन था, जिससे केवल आधे घंटे के भीतर नदी का जलस्तर नौ मीटर बढ़ गया। स्थानीय स्तर पर बारिश न होने के कारण लोगों को कोई पूर्व चेतावनी नहीं मिल सकी और देखते ही देखते सैकड़ों लोग मलबे में बह गए।

इस प्रलय ने रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में घरों, सड़कों, मुख्य पुलों और पनबिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस तबाही के बाद अब चीन और भारत जैसे क्षेत्रीय सहयोगी देश नेपाल को हर संभव तकनीकी और मानवीय सहायता प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं।

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दूसरी लहर का नया खतरा और प्रशासन का अलर्ट

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण (NDRRMA) ने शुक्रवार को तिब्बत सीमा पर हिमस्खलन से बनी एक बैरियर झील का जलस्तर बढ़ने पर नई चेतावनी जारी की है। अधिकारियों के अनुसार, कीचड़ मिश्रित पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में अचानक बाढ़ की दूसरी लहर का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

प्रशासन ने खोज और बचाव दलों के साथ-साथ भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रह रहे सभी लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। वैज्ञानिकों का मानना है कि काराकोरम, सिक्किम और भूटान जैसे इलाकों में ग्लेशियरों की ठीक से निगरानी न होने से डेटा में बड़ी कमी बनी हुई है।

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