नेपाल ने भारत-चीन समेत कई देशों की मदद ठुकराई, कहा- राहत कार्य के लिए हमारी सेना सक्षम

Nepal Rescue Teams: नेपाल में आई बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने भारत-चीन समेत कई देशों की रेस्क्यू टीमों की मदद लेने से मना कर दिया है और कहा कि उनकी सेना आपदा से निपटने में सक्षम है।
Foreign Nepal Rescue Offers
नेपाल सेना और प्रधानमंत्री बालेन शाह(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Foreign Nepal Rescue Offers: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड से भारी तबाही के बावजूद सरकार ने भारत, चीन समेत कई देशों की रेस्क्यू टीमों की मदद लेने से इनकार कर दिया है। नेपाल सरकार का कहना है कि देश की सेना और सुरक्षा एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान चलाने में पूरी तरह सक्षम हैं।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है, जबकि हजारों लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। इसके बावजूद नेपाल सरकार ने विदेशी सैन्य और बचाव टीमों की तत्काल मदद लेने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि स्थानीय प्रशासन, सेना और सुरक्षा बल मिलकर राहत एवं बचाव अभियान को संभालने में सक्षम हैं।

विदेश मंत्रालय ने विदेशी मदद पर क्या कहा?

नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर क्षेत्री ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि इस तरह की बड़ी प्राकृतिक आपदा के दौरान दूसरे देशों द्वारा मदद की पेशकश करना सामान्य है। उन्होंने भारत समेत सभी मित्र देशों का सहयोग की पेशकश के लिए आभार भी जताया।

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल नेपाल को किसी बाहरी देश की सैन्य सहायता या अतिरिक्त आपदा राहत टीमों की तत्काल जरूरत महसूस नहीं हो रही है। उनके अनुसार, नेपाली सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान प्रभावी ढंग से चला रही हैं।

सहायता लेने से मना करने का कारण

नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने साल 2015 के विनाशकारी भूकंप के दौरान मिले अनुभवों से इस बार सबक लिया है। उस समय कई देशों की राहत और बचाव टीमें नेपाल पहुंची थीं, लेकिन उनके बीच समन्वय को लेकर कई चुनौतियां सामने आई थीं।

इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को भेजने के कई प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। भारत की NDRF के अलावा चीन, अमेरिका, ब्रिटेन और जापान सहित कई देशों ने मदद की पेशकश की थी।

दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश की ओर से भी बचाव दल भेजने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन नेपाल सरकार ने सभी देशों का धन्यवाद करते हुए विदेशी टीमों की तत्काल आवश्यकता से इनकार कर दिया।

फ्लैश फ्लड से मची भारी तबाही

बुधवार को नेपाल के भोटे कोशी-त्रिशूली कॉरिडोर के पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियर फटने के बाद अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। तेज बहाव में कई घर और अन्य निर्माण बह गए, जबकि बड़ी संख्या में लोग प्रभावित इलाकों में फंस गए।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 469 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राहत और बचाव टीमों ने 1,545 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। इसके अलावा, 1000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

लापता लोगों में 28 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। नेपाली सेना और सुरक्षा एजेंसियों की टीमें लगातार दुर्गम इलाकों में खोज अभियान चला रही हैं।

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सड़कें, पुल और बिजली व्यवस्था को भारी नुकसान

बाढ़ के तेज बहाव से नेपाल के कई सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि बिजली ग्रिड भी प्रभावित हुए हैं।

रसुवागढ़ी और तातोपानी जैसे दूरदराज के इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना और घायलों को सुरक्षित स्थानों पर एयरलिफ्ट करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के कारण बचाव अभियान में भी मुश्किलें आ रही हैं।

नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और सेना की टीमें लगातार मलबा हटाने, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी हुई हैं। नेपाल सरकार को उम्मीद है कि स्थानीय संसाधनों और सुरक्षा बलों की मदद से इस गंभीर मानवीय संकट से निपटा जा सकेगा।

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