नेपाल में वेलेंटाइन डे मनाने का अनोखा तरीका, इस दिन “क्ले-डेट” पर जाते हैं जोड़े
नेपाल में जोड़ों ने वैलेंटाइन डे पर अपने प्यार का इजहार करने के लिए मिट्टी से विभिन्न आकृतियाँ, जीव और सामग्री बनाकर एक नया तरीका निकाला। दर्जनों जोड़ों ने इस दिन को यादगार बनाने के लिए मिट्टी से दिल, सितारा, खरगोश और..
- Written By: अमन उपाध्याय
नेपाल में वेलेंटाइन डे मनाने का अनोखा तरीका, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )
काठमांडू: नेपाल में वैलेंटाइन डे मनाने के लिए प्रेमी जोड़ों ने अपने प्यार का इजहार करने का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने मिट्टी से विभिन्न आकृतियाँ, जीव और वस्तुएँ बनाकर एक खास अनुभव साझा किया। इन जोड़ों ने ‘मिट्टी की डेट’ पर जाकर एक-दूसरे के साथ मिलकर आकृतियाँ गढ़ीं, जिससे उनका रिश्ता और भी गहरा हुआ।
दर्जनों जोड़ों ने इस दिन को यादगार बनाने के लिए मिट्टी से दिल, सितारा, खरगोश और अन्य जीव बनाए। प्रतिभागियों में से एक सृष्टि राय ने एएनआई को बताया, “मेरे हिसाब से, इस तरह की गतिविधि जोड़े के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में मदद करेगी। यह गतिविधि मज़ेदार तरीके से क्वालिटी टाइम बिताने के बारे में भी है, जो जाहिर तौर पर रिश्ते को मजबूत करेगी।”
खास तरीके से मनाया वैलेंटाइन डे
राय ने शुक्रवार को अन्य जोड़ों के साथ कार्यक्रम में अपने साथी के साथ कई घंटे बिताए और विभिन्न आकृतियाँ और जीव बनाए। वैलेंटाइन डे पर, दुनिया भर के जोड़ों ने इस खास अवसर पर उपहारों का आदान-प्रदान करके और अपने प्यार का इजहार करके इस दिन को मनाया।
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रिश्ते को विकसित करने और आगे बढ़ाने का उद्देश्य
क्ले डेट कार्यक्रम की आयोजकों में से एक सुमित्रा बराल ने एएनआई को बताया, “वेलेंटाइन डे पर इस कार्यक्रम को आयोजित करने के पीछे मुख्य उद्देश्य इस विश्वास का पालन करना है कि मिट्टी को विभिन्न आकृतियों में ढाला जा सकता है। मिट्टी को उसके कच्चे रूप में किसी भी रूप में विकसित किया जा सकता है, इस कार्यक्रम के लिए जोड़ों को लक्षित किया गया था जिसमें वे अपने रिश्ते को विकसित करने और आगे बढ़ाने के लिए भाग ले रहे हैं।”
संत वेलेंटाइन की याद में हुई थी इसकी शुरूआत
सप्ताह भर चलने वाले उत्सव का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त त्योहार बन गया है। लोगों का मानना है कि इस दिन की शुरुआत संत वेलेंटाइन की याद में हुई थी, जिन्होंने प्यार और शादी के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था। वे हर साल 14 फरवरी को उनके समर्पण का सम्मान करने के लिए इस दिन को मनाते हैं।
( एजेंसी इनपुट के साथ )
