नाडा में खालिस्तानी चरमपंथ की मुखर आलोचक नैंसी ग्रेवाल की हत्या (सोर्स-सोशल मडिया)
Khalistani Extremism In Canada Murder: कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथ की मुखर आलोचक और कनाडाई नागरिक नैंसी ग्रेवाल की निर्मम हत्या के बाद पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंताएं उठने लगी हैं। वॉशिंगटन स्थित ‘ग्लोबल स्ट्रैट व्यू’ की एक रिपोर्ट में इस घटना को कनाडा और उत्तरी अमेरिका में सक्रिय चरमपंथी नेटवर्क के बढ़ते प्रभाव का नतीजा बताया गया है। इस दुखद घटना ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों से संचालित होने वाली कथित आतंकी और आपराधिक गतिविधियों पर नकेल कसने की मांग को तेज कर दिया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर भी लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है क्योंकि नैंसी को पहले भी कई बार धमकियां मिली थीं।
नैंसी ग्रेवाल स्वयं सिख समुदाय से ताल्लुक रखती थीं और वह गुरुद्वारों को कथित रूप से खालिस्तानी आतंकवाद के अड्डों में बदलने के प्रयासों का कड़ा विरोध करती थीं। उन्होंने विंडसर गुरुद्वारा और कनाडा के अन्य हिस्सों में सक्रिय प्रभावशाली लोगों के खिलाफ हमेशा खुलकर अपनी राय रखी थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि पंजाब के कुछ लोग भी इन खालिस्तानी ताकतों की मदद कर रहे हैं।
उनकी इस मुखरता के कारण उन्हें अपने ही स्थानीय गुरुद्वारे में कई लोगों द्वारा चुप रहने की चेतावनी भी दी गई थी। वह धार्मिक स्थलों के माध्यम से चलाए जा रहे चरमपंथी नेटवर्क को समाज के लिए एक बड़ा खतरा मानती थीं। उनकी हत्या ने यह साबित कर दिया है कि चरमपंथी तत्व अपनी आलोचना करने वालों की आवाज दबाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार नैंसी ग्रेवाल को लगभग 40 बार जान से मारने की धमकियां मिली थीं लेकिन पुलिस ने उन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं की। नवंबर 2025 में उनके घर पर एक भयानक आगजनी का हमला भी हुआ था जिसमें उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाया गया था। इसके बावजूद रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं की जिससे उनकी सुरक्षा दांव पर लगी रही।
नैंसी की मां शिंदर पाल ग्रेवाल ने भी आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को मिलने वाली धमकियों की जानकारी पुलिस को बार-बार दी गई थी। उन्होंने संदेह जताया है कि उनकी बेटी के घर पर पहले हुए आगजनी हमले के पीछे जो लोग थे, वही इस हत्या के लिए भी जिम्मेदार हो सकते हैं। पुलिस के पास हमले से जुड़े वीडियो फुटेज और सड़क के कैमरे की रिकॉर्डिंग मौजूद होने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
‘ग्लोबल स्ट्रैट व्यू’ की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि चरमपंथी संगठनों का प्रभाव कनाडा के गुरुद्वारों के नेटवर्क पर बहुत गहरा है। इन गुरुद्वारों को कथित तौर पर अवैध हथियारों, मादक पदार्थों और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के लिए माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। वकील और लेखक संजय लजार ने खालिस्तानी संगठनों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और हिंसक गतिविधियों में शामिल तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विंडसर पुलिस और आरसीएमपी ने इस संवेदनशील मामले में पर्याप्त तत्परता नहीं दिखाई जिससे अपराधी बेखौफ घूमते रहे। इस घटना ने कनाडा की कानून व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने की क्षमता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब पूरे देश में चरमपंथी नेटवर्क और धार्मिक स्थलों से संचालित होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की गहन जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
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राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इन चरमपंथी संगठनों पर नकेल नहीं कसी गई तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। नैंसी ग्रेवाल की हत्या ने उत्तरी अमेरिका में सक्रिय इन नेटवर्कों के खतरनाक इरादों को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है। सरकार से मांग की जा रही है कि वह धार्मिक स्थलों के नाम पर होने वाली आतंकी गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाए।