Myanmar Earthquake: भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में फिर कांपी धरती, दो दिन में दो भूकंप से दहशत
Myanmar Earthquake: पिछले 48 घंटों में म्यांमार में 3.5 और 3.9 तीव्रता के दो भूकंप आने से लोगों में चिंता और डर का माहौल है, क्योंकि देश भूकंप के खतरे में रहता है।
- Written By: प्रिया सिंह
म्यांमार भूकंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
Myanmar Earthquake Two Quakes in 48 Hrs: भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में पिछले दो दिनों के भीतर एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं, जिसने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, 16 नवंबर को 3.5 तीव्रता का एक सतही भूकंप दर्ज किया गया जिसकी गहराई सिर्फ 10 किलोमीटर थी। इससे पहले, 14 नवंबर को भी 3.9 तीव्रता का एक और भूकंप आया था जिसने म्यांमार को एक बार फिर भूकंप के बड़े खतरे की याद दिला दी है। म्यांमार में पहले भी बड़े भूकंपों से भारी नुकसान हो चुका है, इसलिए इन लगातार झटकों ने लोगों में दहशत फैला दी है।
म्यांमार में दो दिन में दो भूकंप, लोगों में बढ़ी दहशत
म्यांमार की राजधानी नेप्यीडॉ और आसपास के इलाकों में रविवार सुबह धरती एक बार फिर कांप उठी। यह झटका सुबह 02:40 बजे भारतीय समय के अनुसार दर्ज किया गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने जानकारी दी कि इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई। इस भूकंप का एक महत्वपूर्ण पहलू इसकी गहराई है, जो कि सिर्फ 10 किलोमीटर थी। भूगर्भ वैज्ञानिक ऐसे भूकंपों को ‘शैलो क्वेक’ या ‘सतही भूकंप’ कहते हैं। ये जमीन के बहुत करीब होते हैं, इसलिए इनकी ऊर्जा सीधे धरातल पर पहुंचती है। यही कारण है कि ये इमारतों में तेज कंपन पैदा करते हैं और ढांचागत नुकसान का खतरा बढ़ा देते हैं।
इससे ठीक पहले, 14 नवंबर को भी म्यांमार में 3.9 तीव्रता का एक भूकंप दर्ज किया गया था। वह भूकंप 35 किलोमीटर की गहराई पर आया था। पिछले 48 घंटों में आए ये दो लगातार भूकंप, जिनमें से एक सतही था, ने स्थानीय निवासियों की चिंता काफी बढ़ा दी है। लोग दहशत में हैं क्योंकि इसी साल मार्च 2025 में आए एक जोरदार भूकंप ने 3500 से भी ज्यादा लोगों की जान ले ली थी।
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क्यों है म्यांमार में भूकंप का इतना बड़ा खतरा?
म्यांमार दुनिया के उन देशों में शामिल है जो भूकंप के बड़े जोखिम पर हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि यह देश चार प्रमुख टेक्टॉनिक प्लेटों, भारतीय प्लेट, यूरेशियन प्लेट, सुंडा प्लेट और बर्मा प्लेट, के मिलने के स्थान पर मौजूद है। इन प्लेटों की आपस में टक्कर और लगातार खिसकने की प्रक्रिया के कारण इस क्षेत्र में बार-बार भूगर्भीय हलचल होती रहती है।
इसके अलावा, म्यांमार के भीतर से होकर करीब 1,400 किलोमीटर लंबी एक बड़ी ट्रांसफॉर्म फॉल्ट लाइन गुजरती है, जिसे सागाइंग फॉल्ट कहा जाता है। भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि यही फॉल्ट लाइन देश के बड़े हिस्से को भूकंप के गंभीर खतरे में रखती है।
बड़ा खतरा इन क्षेत्रों पर
सागाइंग फॉल्ट जिन इलाकों से गुजरता है, वे हैं, सागाइंग, मंडाले, बागो और यांगून। यह चिंता का विषय है क्योंकि म्यांमार की लगभग 46 फीसदी आबादी इन्हीं क्षेत्रों में निवास करती है। इतनी बड़ी आबादी का भूकंपीय खतरे वाले क्षेत्र में रहना, किसी भी बड़े भूकंप की स्थिति में भारी जान-माल के नुकसान का जोखिम पैदा करता है।
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इतिहास में भी म्यांमार ने बड़े भूकंपों की विभीषिका झेली है। मार्च 2025 के भयंकर भूकंप के अलावा 1903 में बागो में आए 7.0 तीव्रता के भूकंप की मार राजधानी यांगून तक महसूस की गई थी। ये ऐतिहासिक घटनाएँ आज भी एक चेतावनी के तौर पर याद की जाती हैं कि म्यांमार को हर समय बड़े भूकंपों के लिए तैयार रहना होगा। वर्तमान में आए इन छोटे भूकंपों को भी बड़े झटके से पहले के संकेत के रूप में देखा जा सकता है, जिससे लोगों में खौफ का माहौल बना हुआ है।
