300 से अधिक परमाणु बमों जितनी ऊर्जा…म्यांमार भूकंप के बाद भी मचेगी तबाही, वैज्ञानिकों के दावे से मचा हड़कंप
Myanmar earthquake: म्यांमार में विनाशकारी भूकंप के बाद हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। शुक्रवार को आए जबरदस्त झटकों के कारण हजारों लोगों की मौत हो चुकी है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
300 से अधिक परमाणु बमों जितनी ऊर्जा...म्यांमार भूकंप के बाद भी मचेगी तबाही, वैज्ञानिकों के दावे से मचा हड़कंप
नवबारत डेस्क: म्यांमार और थाईलैंड में 29 मार्च शुक्रवार 7.7 तीव्रता से आए भूकंप के बाद तबाही के मंजर देखने को मिल रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से तबाही की तस्वीरें लगातार सामने आ रही है। वहीं इस भूकंप को लेकर विशेषज्ञों ने जो दावा किया है वो बहुत ही चौंकाने वाला है।
विशेषज्ञों की मानें तो म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने इतनी ऊर्जा छोड़ी, जो 300 से अधिक परमाणु बमों के बराबर थी। ये जानकारी भूविज्ञानी (Geologist) जेस फीनिक्स ने CNN न्यूज को दी है। उन्होंने दावा किया कि, क्षेत्र में महीनों तक झटके महसूस किए जाएंगे।
मांडले शहर में था भूकंप का केंद्र
अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र म्यांमार के मांडले शहर में 10 किलोमीटर की गहराई में था। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, अब तक 1,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, तो वहीं USGS का अनुमान है कि ये आंकड़ा 10,000 से अधिक हो सकता है।
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विनाशकारी भूकंप ने बिगाडे़ म्यामांर के हालात
म्यांमार में विनाशकारी भूकंप के बाद हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। शुक्रवार को आए जबरदस्त झटकों के कारण हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं शनिवार को एक और 5.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने बचाव कार्यों को और मुश्किल बना दिया है। म्यांमार में शुक्रवार को आए 7.5 तीव्रता के भूकंप के बाद लगातार झटकों का सिलसिला भी जारी रहा। बता दें कि अब तक कुल 12 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए थे। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में मांडले, बागो, मागवे, सागाइंग और शान स्टेट शामिल हैं। इन झटकों की वजह से कई इमारतें गिर चुकी हैं, सड़कें ध्वस्त हो गई हैं और बिजली आपूर्ति ठप पड़ गई है। सारा सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्थ हो चुका है।
संचार व्यवस्था पूरी तरह से ठप
भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था भी ठप हो चुकी है, सड़कें ध्वस्त हो गई हैं और हजारों लोग बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रहे हैं। भारत ने अपने यहां से पहली खेप में 40 टन राहत सामग्री भेजी है और नौसेना के जहाजों को भी राहत कार्यों में लगाया गया है। राहत और बचाव कार्यों में लगी टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई इलाकों में अब तक संपर्क ही नहीं हो पा रहा है।
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मांडले एयरपोर्ट का एक हिस्सा गिर चुका है, जिससे राहत सामग्री और बचाव दलों की आवाजाही मुश्किल हो रही है। इसके अलावा, यांगून-मांडले हाईवे पर भी भारी क्षति हुई है, जिससे परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
