ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (सोर्स-सोशल मीडिया)
Mojtaba Khamenei Leadership Transition: ईरान में जारी भीषण महायुद्ध के बीच सत्ता के शीर्ष पर एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब उनके बेटे ने कमान संभाली है। गार्डियन काउंसिल ने मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुनकर दुनिया को एक बहुत ही कड़ा संदेश दिया है। मोजतबा खामेनेई नेतृत्व परिवर्तन की इस प्रक्रिया ने वैश्विक राजनीति में नई चर्चाएं और भारी हलचल पैदा कर दी है।
मोजतबा खामेनेई अब ईरान के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बन गए हैं जिनके पास राष्ट्रपति से भी ज्यादा संवैधानिक अधिकार हैं। उनकी नियुक्ति एक ऐसे नाजुक समय में हुई है जब देश बाहरी हमलों और भीषण आंतरिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। पिता की मौत के बाद मोजतबा के सामने अब ईरान की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसकी धार्मिक साख बचाने की बड़ी चुनौती है।
मोजतबा ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान IRGC की हबीब बटालियन में अपनी सेवाएं देकर सैन्य हलकों में गहरी पहचान बनाई थी। भले ही उन्होंने कभी कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं लिया पर वे सालों से पर्दे के पीछे से पूरे सुरक्षा तंत्र को नियंत्रित करते रहे। उनके बेहद वफादार सहयोगी आज भी ईरान की शक्तिशाली खुफिया एजेंसियों और कुद्स फोर्स के शीर्ष पदों पर मजबूती से बैठे हुए हैं।
विभिन्न पश्चिमी रिपोर्ट्स के अनुसार मोजतबा खामेनेई के पास गुप्त रूप से अरबों डॉलर की बेतहाशा और पूरी तरह अघोषित दौलत है। लंदन, दुबई और स्पेन जैसे देशों में उनके और उनके करीबियों के नाम पर करोड़ों डॉलर की आलीशान संपत्तियां और लग्जरी होटल मौजूद हैं। यह पूरा वित्तीय साम्राज्य शेल कंपनियों और अली अंसारी जैसे प्रभावशाली बिचौलियों के एक बहुत ही जटिल नेटवर्क के माध्यम से चलता है।
मोजतबा ने अपने पिता के कार्यालय में कई सालों तक एक प्रमुख सलाहकार और सबसे शक्तिशाली ‘गेटकीपर’ के रूप में काम किया है। साल 2019 में अमेरिकी प्रशासन ने खुलासा किया था कि सर्वोच्च नेता ने अपने कई महत्वपूर्ण अधिकार मोजतबा को गुप्त रूप से सौंप दिए थे। वे सरकारी मीडिया से लेकर राष्ट्रपति चुनावों के फैसलों तक में दखल देने वाली ईरान की सबसे प्रभावशाली शख्सियत माने जाते रहे हैं।
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मोजतबा मूल रूप से एक मध्यम स्तर के मौलवी रहे हैं पर उनकी दावेदारी मजबूत करने के लिए अब उन्हें अयातुल्ला कहा जाने लगा है। ईरान के पुराने नियमों में संशोधन करके उन्हें सर्वोच्च नेता बनाया गया है ताकि खामेनेई परिवार का वर्चस्व देश पर बना रहे। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वे अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे इस भीषण युद्ध को कैसे संभालते हैं।