Explainer: क्या है सट्टेबाजों का नया जाल मेंशन मार्केट? ट्रंप के भाषण पर पैसा लगाकर कमाए लाखों, जानें सब कुछ

Mention Markets Controversy: मेंशन मार्केट प्रेडिक्शन मार्केट का नया रूप है, जहां लोग नेताओं या सेलिब्रिटीज के खास शब्द बोलने पर दांव लगाते हैं। जानिए यह कैसे काम करता और विवादित क्यों है?
US Mention Markets Controversy
अमेरिका में डिजिटल सट्टेबाजी को लेकर मचा बवाल (AI जनरेटेड इमेज)
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Mention Markets White House Kalshi Controversy: डिजिटल सट्टेबाजी ने पूरी दुनिया में तेजी से अपनी पैठ बनाई है। फिर चाहे वह क्रिकेट का मैच हो या फिर किसी देश का चुनाव आप अपने फोन पर एक क्लिक के जरिए पैसा लगाकर सट्टा खेल सकते हैं। जहां आपको एक लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक जीतने का ऑफर दिया जाता है। और एक बार जो कोई भी इसके जाल में फंसा उसका निकलना लगभग नामुमकिन माना जाता है। 

अब इसका एक नया रूप सामने आया है, जिसे मेंशन मार्केट कहा जाता है। इसमें किसी घटना के परिणाम के बजाय यह अनुमान लगाया जाता है कि कोई व्यक्ति तय समय में खास शब्द, नाम या वाक्यांश बोलेगा या नहीं।  यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन अमेरिका में इसका उपयोग अप्रत्याशित तेजी से बढ़ा है और जिसने अमेरिकी प्रशासन को भी इस पर सोचने पर मजबूर कर दिया है। आइए आपको बताते हैं कि मेंशन मार्केट क्या है और यह कैसे काम करता है? और अमेरिका में इसे लेकर क्या विवाद चल रहा है?

कैसे काम करता है मेंशन मार्केट?

मेंशन मार्केट के काम करने का तरीका बेहद आसान है। इसके प्लेटफॉर्म पर लोगों से सवाल पूछा जाता है कि कोई नेता या सेलिब्रेटी अपने अगले भाषण या इंटरव्यू में कोई खास शब्द बोला जाएगा या नहीं। आमतौर पर प्लेटफॉर्म पर इसके लिए दो विकल्प दिए जाते हैं- हां या नहीं। अगर तय समय में वह शब्द बोला जाता है, तो हां पर पैसा लगाने वाले लोग जीत जाते हैं। अगर शब्द नहीं बोला जाता, तो नहीं चुनने वाले जीतते हैं और उन्हें तय नियमों के अनुसार भुगतान मिलता है।

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मेंशन मार्केट में नेताओं के भाषण लगाया जाता है सट्टा(AI जनरेटेड इमेज)

सामान्य प्रेडिक्शन मार्केट किसी बाहरी घटना पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, चुनाव कौन जीतेगा, ब्याज दर बढ़ेगी या नहीं, कंपनी नया उत्पाद कब पेश करेगी या कोई टीम मैच जीतेगी या नहीं। लेकिन मेंशन मार्केट में नतीजा अक्सर किसी व्यक्ति के शब्दों पर निर्भर करता है। यही अंतर इसे ज्यादा संवेदनशील बनाता है, क्योंकि बोलने वाला व्यक्ति अपने शब्दों के जरिए परिणाम को प्रभावित कर सकता है।

मेंशन मार्केट का सबसे बड़ा नुकसान

मेंशन मार्केट को लेकर सबसे बड़ी चिंता अंदरूनी जानकारी को लेकर है। विशेषज्ञ इसे खतरनाक मान रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर कोई व्यक्ति किसी भाषण लेखक, सहायक या टेलीप्रॉम्प्टर ऑपरेटर को पहले से पता चल जाए कि नेता अपने भाषण में क्या बोलने वाला है, तो वो उन शब्दों पर दांव लगाकर पैसा कमा सकता है। आम व्यक्ति केवल अनुमान लगाएगा, जबकि अंदरूनी जानकारी रखने वाले व्यक्ति को लगभग हर बार परिणाम की जानकारी होगी।

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मेंशन मार्केट में अंदरूनी जानकारी का खतरा (AI जनरेटेड इमेज)

विशेषज्ञों की यह चिंता बेबुनियादी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लंबे समय से टेलीप्रॉम्प्टर ऑपरेटर रहे एक व्यक्ति ने भाषणों में इस्तेमाल होने वाले शब्दों से जुड़े दांव लगाए और पैसा कमाया। मामले का खुलासा होने पर व्हाइट हाउस भी सकते में आ गया। हालांकि, यह अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया का विषय है, इसलिए इसे अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।

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ट्रम्प टेलीप्रॉम्प्टर ऑपरेटर गेब्रियल पेरेज ने पैसा लगाकर कमाए लाखों डॉलर(सोर्स- सोशल मीडिया)

मेंशन मार्केट में हेरफेर करना कितना मुश्किल?

विशेषज्ञों के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर नतीजों को बदलने के कई तरीके हो सकते हैं। दुनिया का लगभग हर बड़ा नेता सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहले से लिखा भाषण ही पढ़ता है। ऐसे में उनके स्टाफ से जुड़ा कोई अधिकारी या उनका भाषण लिखने वाला व्यक्ति उनके भाषण में अपने मुताबिक शब्द शामिल कर सकता है। इसके अलावा किसी कार्यक्रम की स्क्रिप्ट पहले से कई लोगों के पास हो सकती है। टीवी शो, लाइव इंटरव्यू और कॉरपोरेट कॉल में भी कई कर्मचारियों को जानकारी पहले मिलती है। इससे कुछ लोगों को बाकी प्रतिभागियों की तुलना में अनुचित फायदा मिल सकता है।

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मेंशन मार्केट में कई तरीकों से बदले जा सकते हैं परिणाम(AI जनरेटेड इमेज)

गलती से भी बदल सकता है नतीजा

इसके अलावा गलती से भी हेरफेर हो सकती है। कई बार नेता किसी कार्यक्रम में अपने भाषण के दैरान अचानक से दूसरे जरूरी विषयों पर भी बोलना शुरू कर देते हैं। उदाहरण के लिए- अमेरिका इस समय ईरान से युद्ध लड़ रहा है। इस दौरान कई ऐसे मौके आए हैं, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने ईरान में जारी जंग को लेकर बयान देना शुरू कर दिया। इसमें ईरान से जुड़े जरूरी शब्द जैसे- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, मोजतबा खामेनेई और रिजीम चेंज आए हैं। अब इस बात का अंदाजा लगाना लगभर नामुमकिन है कि ट्रंप किसी और कार्यक्रम में ईरान जंग को लेकर बोलेंगे या नहीं। ऐसी स्थिति में दांव लगाने वालों के पैसे पर असर पड़ सकता है। इसलिए बाजार के नियम और परिणाम तय करने वाले स्रोत बेहद स्पष्ट होना जरूरी है।

गलत रिपोर्टिंग भी एक बड़ा खतरा

बाजार के नतीजे तय करने में समाचार और प्रसारण स्रोतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। विश्व कप फाइनल के दौरान एक प्रसारण में कमेंटेटर ने कथित तौर पर अभिनेता मैट डेमन को ब्रैड पिट समझ लिया था। बाद में गलत जानकारी कुछ रिपोर्टों में भी दिखाई दी। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि अगर बाजार गलत स्रोत या गलत पहचान पर निर्भर करता है, तो सही अनुमान लगाने वाला व्यक्ति भी पैसा गंवा सकता है।

Kalshi पर बढ़ी प्रशासन की नजर

अमेरिका में कल्शी (Kalshi) प्रेडिक्शन मार्केट की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। मेंशन मार्केट को लेकर जांच और विवाद के बीच कंपनी ने खेलों से जुड़े कुछ ऐसे बाजार हटाए हैं, जिनमें कमेंटेटर के खास शब्द बोलने पर दांव लगाया जाता था। हालांकि, राजनीति, कॉरपोरेट आय कॉल और समाचार प्रसारण से जुड़े कुछ अन्य बाजार अलग स्थिति में उपलब्ध रहे हैं। जांच का अंतिम दायरा और परिणाम अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

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अमेरिका की सबसे बड़ी मेंशन मार्केट कंपनी कल्शी पर लटकी कार्रवाई की तलवार(सोर्स- सोशल मीडिया)

अमेरिकी राज्यों में विवाद क्यों?  

संघीय जांच के अलावा अमेरिका के कई राज्यों में भी प्रेडिक्शन मार्केट को लेकर कानूनी विवाद चल रहे हैं। कुछ राज्य इन प्लेटफॉर्म्स के खेल संबंधी अनुबंधों को सट्टेबाजी जैसा मानते हैं। कंपनियों का कहना है कि उनके उत्पाद संघीय वित्तीय नियमों के तहत आते हैं। वाशिंगटन, मिशिगन, नेवादा और मैसाचुसेट्स जैसे राज्यों में कल्शी के कुछ बाजारों को लेकर रोक या कानूनी चुनौतियों की खबरें सामने आई हैं।

प्लेटफॉर्म्स का क्या कहना है?

प्रेडिक्शन मार्केट कंपनियों का कहना है कि वे अनियमित जुआ नहीं, बल्कि नियमों और निगरानी वाले बाजार चलाती हैं। उनका तर्क है कि बड़े नेताओं, कंपनियों और सार्वजनिक व्यक्तियों के शब्द पहले से ही शेयर, मुद्रा और क्रिप्टो बाजारों को प्रभावित करते हैं। इसलिए उन शब्दों से जुड़े अनुमान को पूरी तरह बेकार नहीं माना जाना चाहिए। कंपनियां यह भी कहती हैं कि लेनदेन रिकॉर्ड किए जाते हैं और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की जा सकती है।

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आगे क्या हो सकता है?

अमेरिकी नियामक यह देख सकते हैं कि मेंशन मार्केट हेरफेर के लिए कितने संवेदनशील हैं। जांच में प्लेटफॉर्म की निगरानी प्रणाली, अनुबंधों की भाषा, नतीजे तय करने के स्रोत और शिकायत प्रक्रिया की समीक्षा हो सकती है। इसके बाद नए नियम बनाए जा सकते हैं। कुछ बाजारों पर सीमाएं लग सकती हैं और कुछ श्रेणियां पूरी तरह बंद भी की जा सकती हैं। इससे पूरे प्रेडिक्शन मार्केट उद्योग की दिशा प्रभावित हो सकती है।  

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