

Donald Trump Threatens Oman: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओमान को चेतावनी दी है कि अगर वह ईरान के साथ होर्मुज जलमार्ग पर कोई समझौता करता है तो अमेरिका उस पर जबरदस्त बमबारी करेगा। ट्रंप के इस कड़े बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया कूटनीतिक तनाव उत्पन्न हो गया है।
दरअसल, ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक संयुक्त रूट मैप तैयार कर रहे हैं। इस द्विपक्षीय बातचीत से ट्रंप का होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण स्थापित करने का प्लान बड़े खतरे में पड़ गया है, जिसके कारण वे बुरी तरह भड़क उठे हैं।
ट्रंप ने ओमान को चेतावनी देते हुए साफ शब्दों में कहा कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट मामले में कोई दखल दिया तो वे उस पर भीषण बमबारी करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी से ईरानी सरकार पर कड़ा आर्थिक दबाव पड़ रहा है और तेहरान के लोग भले ही अच्छे खिलाड़ी हों, पर वे बर्बाद हो रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके इस फैसले का आगामी नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है। वे देश की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और अपने कड़े निर्णयों पर अडिग रहेंगे, जिससे ईरान और उसके सहयोगी देशों के बीच खलबली मच गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी हथियारों के संबंध में बात करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक जो भी इस्तेमाल किया है, वह बेहद मामूली है। अमेरिका के पास बड़ी संख्या में मध्यम स्तर के कड़े हथियार मौजूद हैं, जो किसी भी आपातकालीन सैन्य चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बाइडन की आलोचना करते हुए कहा कि सुरक्षा के लिए जरूरी कई उन्नत प्रणालियों को यूक्रेन भेज दिया गया था। इन प्रणालियों में इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए जरूरी एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल थे, जिसकी कमी अब अमेरिकी सैन्य बलों को महसूस हो रही है।
हैरानी की बात यह है कि ओमान में पहले से ही अमेरिका का एक बड़ा सैन्य बेस मौजूद है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना लगातार कर रही है। इसके बावजूद ट्रंप की यह नई धमकी हैरान करने वाली है। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच हुआ साठ दिन का सीमित युद्धविराम भी आज खत्म हो रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका आईआरजीसी के साथ पिछले दरवाजों से बातचीत कर रहा है और अब ईरान के पास घुटने टेकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए बेहतर होगा कि वह कूटनीतिक रूप से आत्मसमर्पण कर दे, नहीं तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।