Hormuz खोलने के लिए MBS का गेम प्लान: लेबनान सीजफायर और ईरान शांति वार्ता की स्टोरी
Middle East Diplomacy: लेबनान में 10 दिन का सीजफायर सऊदी क्राउन प्रिंस MBS की कूटनीति का नतीजा है। Hormuz स्ट्रेट को खुलवाने के लिए ट्रंप पर भारी दबाव बनाया। पाकिस्तान को भी 3 अरब डॉलर की मदद मिली।
- Written By: प्रिया सिंह
मोहम्मद बिन सलमान और डोनाल्ड ट्रम्प (सोर्स-सोशल मीडिया)
Saudi Arabia Diplomacy Strategy: मध्य पूर्व में लेबनान के अंदर हाल ही में लागू हुआ सीजफायर एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जीत है। यह केवल एक सैन्य समझौता नहीं बल्कि सऊदी अरब की कूटनीति रणनीति का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पूरे शांति समझौते के पीछे सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सबसे अहम भूमिका मानी जा रही है। उन्होंने ईरान के साथ महत्वपूर्ण बातचीत शुरू करने और क्षेत्र में शांति लाने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है।
Hormuz स्ट्रेट का महत्व
सऊदी अरब का इस समय सबसे बड़ा लक्ष्य वैश्विक तेल सप्लाई के अहम रास्ते Hormuz स्ट्रेट को फिर से खुलवाना है। अगर मध्य पूर्व का यह अहम समुद्री रास्ता बंद रहता है तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही बुरा असर पड़ सकता है। इसी कारण खाड़ी देशों पर भारी आर्थिक दबाव आ रहा है जिसे कम करने के लिए यह नई कूटनीतिक पहल की गई है।
ट्रंप पर कूटनीतिक दबाव
एक रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद बिन सलमान ने एक निजी फोन कॉल पर डोनाल्ड ट्रंप के साथ बहुत साफ बात की थी। उन्होंने ट्रंप से स्पष्ट कहा कि क्षेत्र में शांति लाने के लिए लेबनान में 10 दिन का सीजफायर लागू करना बहुत जरूरी है। MBS के इसी भारी दबाव के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को इसके लिए राजी किया।
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ईरान की कड़ी शर्तें
इस पूरी शांति प्रक्रिया में ईरान का सख्त रुख और उसकी पुरानी शर्तें भी एक बहुत ही अहम भूमिका निभा रही हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया था कि लेबनान में शांति होने तक अमेरिका के साथ कोई भी ठोस बातचीत आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। लेबनान में मौजूद हिज्बुल्लाह ईरान द्वारा समर्थित ताकत है इसलिए यह शांति समझौता अमेरिका और ईरान वार्ता के लिए जरूरी था।
सऊदी अरब का डबल गेम
सऊदी अरब की इस पूरी कूटनीतिक रणनीति को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ एक तरह से डबल गेम का नाम भी दे रहे हैं। एक तरफ उसने अपने ताइफ स्थित किंग फहद एयर बेस को अमेरिका के लिए खोलकर ईरान पर भारी सैन्य दबाव बनाए रखा। वहीं दूसरी तरफ अब वह होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और मध्य पूर्व में पूरी तरह शांति बहाल करने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान की अहम भूमिका
इस अहम कूटनीतिक खेल में इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच बड़ी बातचीत कराने का मुख्य मंच बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान सऊदी अरब के पूरे समर्थन के बिना यह बड़ी अंतरराष्ट्रीय भूमिका नहीं निभा सकता था। हाल ही में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का भारी कर्ज देकर उसकी आर्थिक स्थिति को बड़ी मदद दी है।
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आगे का रास्ता और चुनौतियां
सऊदी अरब बिल्कुल नहीं चाहता कि क्षेत्र में चल रहा यह भयंकर संघर्ष किसी भी तरह से और ज्यादा आगे बढ़े। यमन में हूती विद्रोहियों के कारण बाब अल मंदेब जैसे दूसरे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते भी बड़े खतरे में पड़ चुके हैं। अब देखना होगा कि इजरायल इस समझौते का कितना पालन करता है और Hormuz स्ट्रेट कब तक सुरक्षित खुल पाता है।
