

Iran President Masoud Pezeshkian Denies Resignation: ईरान की आंतरिक राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के इस्तीफे की खबरें तेजी से फैलने लगीं। इन खबरों ने न केवल ईरान के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा की, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कूटनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया। हालांकि, अब राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने खुद सामने आकर इन तमाम अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है और स्पष्ट किया है कि वे अपने पद पर बने रहेंगे।
अल अरबिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, मसूद पेजेश्कियन ने साफ शब्दों में कहा है कि वह अपना पद नहीं छोड़ रहे हैं और अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन सामान्य रूप से कर रहे हैं। रविवार को प्रसारित हुई कई रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि राष्ट्रपति ने अपना इस्तीफा ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को सौंप दिया है। इन खबरों को खारिज करते हुए पेजेश्कियन ने कहा कि मैं अपना काम जारी रखूंगा और भविष्य की किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं। उनके इस बयान को सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत दिखाने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने देश की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को दोहराया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार समस्याओं को कालीन के नीचे छिपाने के बजाय उन्हें जनता के सामने वास्तविक रूप में रखने में विश्वास रखती है। पेजेश्कियन के अनुसार, मौजूदा संकटों की गंभीरता को देखते हुए लोगों के साथ पारदर्शिता बरतना बेहद जरूरी है ताकि देश के सामने खड़ी चुनौतियों का सामना सामूहिक रूप से किया जा सके। उनका मानना है कि जब तक जनता को समस्याओं की वास्तविकता का पता नहीं चलेगा, तब तक समाधान की दिशा में बढ़ना मुश्किल होगा।
भले ही राष्ट्रपति ने इस्तीफे से इनकार किया हो, लेकिन ईरान के भीतर सत्ता का तनाव जगजाहिर है। पिछले कई महीनों से ऐसी खबरें लगातार सामने आ रही हैं कि ईरान की ताकतवर सैन्य और सुरक्षा संस्था, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और राष्ट्रपति कार्यालय के बीच तनाव अपने चरम पर है। सूत्रों का दावा है कि IRGC ने धीरे-धीरे राष्ट्रपति के कई महत्वपूर्ण अधिकारों को सीमित करना शुरू कर दिया है और सरकार के अहम अंगों पर अपना प्रभाव बढ़ा लिया है।
IRGC और सरकार के बीच चल रहे इस टकराव ने ईरान के प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस आंतरिक लड़ाई के कारण पेजेश्कियन प्रशासन एक तरह के राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध में फंस गया है। इसका सबसे बुरा असर ईरान की कूटनीतिक बातचीत और विदेशी नीति पर पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, सरकार के भीतर जरूरी कैबिनेट बदलाव और कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले भी लंबे समय से अटके हुए हैं। ऐसे में पेजेश्कियन का पद पर बने रहना उनके लिए किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि उन्हें एक तरफ आर्थिक संकट और दूसरी तरफ सेना के हस्तक्षेप से जूझना पड़ रहा है।