युद्ध के बीच ईरान ने दी भारत को खुशखबरी, होर्मुज स्ट्रैट को लेकर किया बड़ा ऐलान, जानिए किसे होगा तगड़ा नुकसान

Middle-East Tension: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक बड़ा और कड़ा ऐलान किया है। यह ऐलान भारत के नजरिए से अच्छी खबर है।
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सांकेतिक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक बड़ा और कड़ा ऐलान किया है। यह ऐलान भारत के नजरिए से अच्छी खबर है। ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ अमेरिका, इजराइल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगी देशों के जहाजों के लिए पूरी तरह से बंद है।

यह ऐलान गुरुवार को ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB के जरिए किया गया। IRGC ने साफ चेतावनी दी कि अगर अमेरिका, इजराइल, यूरोप या उनके सहयोगी देशों का कोई भी जहाज इस जरूरी पानी के रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा तो उस पर हमला करके उसे खत्म कर दिया जाएगा।

भारत के लिए खुशख़बरी क्यों?

अब नए ऐलान से यह साफ हो गया है कि भारत को भी इस सख्ती से छूट है और उसे भी तेल मिलेगा। इससे पहले बुधवार को ईरान ने कहा था कि सिर्फ चीनी झंडे वाले जहाजों को ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुज़रने की इजाजत होगी। ईरानी अधिकारियों ने इसे युद्ध के दौरान तेहरान के प्रति बीजिंग के सपोर्ट और हमदर्दी भरे रवैये के लिए शुक्रिया के तौर पर देखा।

ईरान के पास होर्मुज स्ट्रैट का कंट्रोल

ईरानी अधिकारियों ने कहा कि इंटरनेशनल कानून और संबंधित प्रस्तावों के अनुसार, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को युद्ध के समय होर्मुज स्ट्रेट से ट्रैफिक कंट्रोल करने का पूरा अधिकार है। IRGC ने दोहराया कि उसने पहले भी कहा है कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को युद्ध के समय स्ट्रेट को कंट्रोल करने का अधिकार है। यह घोषणा शनिवार को US और इज़राइल के ईरान के खिलाफ एक जॉइंट मिलिट्री ऑपरेशन शुरू करने के बाद हुई, जिसने स्ट्रेट को लगभग बंद कर दिया। इस कार्रवाई से दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया है और दुनिया भर में एनर्जी सप्लाई में गंभीर संकट पैदा हो गया है।

होर्मुज स्ट्रैट से गुजरता है 20% तेल

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के कुल समुद्री तेल शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) ले जाता है, जो इसे ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बहुत ज़रूरी बनाता है। यह फारस की खाड़ी के पोर्ट तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है, जिसमें दुबई का जेबेल अली पोर्ट भी शामिल है, जो दुनिया का दसवां सबसे बड़ा कंटेनर टर्मिनल है।

ईरान ने लड़ाई शुरू होने के बाद से इस पानी के रास्ते को बंद कर दिया है। मैरीटाइम ट्रैकिंग वेबसाइट पर लाइव डेटा से पता चलता है कि कुवैत के उत्तर में और दुबई के तट पर सैकड़ों टैंकर और दूसरे जहाज़ लंगर डाले हुए हैं। ईरान का अपना बेड़ा भी स्ट्रेट के पूर्वी छोर पर बंदर अब्बास पोर्ट के पास तैनात है।

ईरान-ईराक युद्ध में जारी था ट्रैफिक

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि पूरी तरह से ब्लॉकेड का सीधा असर एशिया-यूरोप के मुख्य समुद्री रास्तों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन खाड़ी के व्यापार और तेल और गैस सप्लाई पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा। इतिहास में यह पहली बार है कि होर्मुज स्ट्रेट को इस तरह से कमर्शियल जहाजों के लिए बंद किया गया है। 1980-1988 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी तेल टैंकरों पर हमलों के बावजूद ट्रैफिक जारी रहा।

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