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कुपोषण वैश्विक संकट: कुपोषण और विकास रुकने से हर साल 10 लाख बच्चों की हो रही मौत

Stunted Growth Deaths: ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, कुपोषण और अवरुद्ध विकास के कारण हर साल लगभग 10 लाख बच्चों की मौत हो रही है। यह तीसरा सबसे बड़ा वैश्विक खतरा बन चुका है।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Dec 10, 2025 | 07:43 AM

कुपोषण और अवरुद्ध विकास के कारण हर साल लगभग 10 लाख बच्चों की मौत हो रही (सोर्स- सोशल मीडिया)

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1 Million Child Deaths Annually: कुपोषण और अवरुद्ध विकास दुनिया भर के बच्चों के लिए एक बड़ा और जानलेवा खतरा बन चुका है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लगभग 10 लाख बच्चे शारीरिक कमजोरी और कुपोषण से अपनी जान गंवा रहे हैं। यह स्थिति उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों में सबसे अधिक चिंताजनक है। बाल स्वास्थ्य पर यह गंभीर संकट अब वैश्विक स्वास्थ्य-पोषण नीतियों पर दबाव बढ़ा रहा है।

हर साल 10 लाख बच्चों की मौत, तीसरा सबसे बड़ा वैश्विक खतरा

कुपोषण, अवरुद्ध विकास (Stunted Growth) और शारीरिक कमजोरी दुनिया के सामने एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुकी है। ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2023’ (Global Burden of Disease 2023) की ताजा रिपोर्ट, जो अंतर्राष्ट्रीय जर्नल द लैंसेट चाइल्ड ऐंड अडोलेसेंट हेल्थ में प्रकाशित हुई है, ने इस खतरे से आगाह किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुपोषण और इससे जुड़ी अन्य समस्याओं के कारण हर साल लगभग 10 लाख बच्चों की जान जा रही है।

उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में गहरा संकट

डेटा बताते हैं कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौतों में कुपोषण अब तीसरा सबसे बड़ा वैश्विक जोखिम बन चुका है। हालांकि, वर्ष 2000 में विकास-असफलता के कारण जहां 27.5 लाख बच्चों की मौतें दर्ज की गई थीं, वहीं 2023 में यह संख्या घटकर 8.8 लाख रह गई है।

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इस प्रगति के बावजूद संकट बरकरार है। सबसे अधिक 6.18 लाख मौतें उप-सहारा अफ्रीका में दर्ज हुईं, जबकि दक्षिण एशिया में यह संख्या 1.65 लाख रही। यह स्पष्ट करता है कि इन क्षेत्रों में बच्चों का स्वास्थ्य और भविष्य खतरे में है।

मामूली बीमारियां बन रहीं जानलेवा

रिपोर्ट के चौंकाने वाले तथ्य यह भी हैं कि दुनिया में ठिगने (स्टंटेड) बच्चों की संख्या पहले के अनुमानों से कहीं अधिक है। इन बच्चों के लिए निमोनिया, मलेरिया, खसरा और डायरिया जैसी मामूली बीमारियां भी जानलेवा साबित होती हैं।

2023 में पांच वर्ष से कम उम्र के लगभग 8 लाख बच्चे इन्हीं संक्रमणों का शिकार होकर मौत के मुंह में समा गए। संक्रमण से मरने वाले बच्चों का भारी हिस्सा कुपोषण से जूझ रहा था। उदाहरण के लिए, उप-सहारा अफ्रीका में डायरिया से मरने वाले बच्चों में 77 फीसदी और सांस संबंधी संक्रमणों से मरने वालों में 65 फीसदी बच्चे कुपोषित थे।

स्वास्थ्य-पोषण नीतियों पर बढ़ा वैश्विक दबाव

इस अध्ययन के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों पर बाल स्वास्थ्य नीतियों को मजबूत करने का दबाव बढ़ गया है। रिसर्चर्स का मानना है कि बच्चों में विकास-अवरुद्धता कई कारणों का परिणाम है, जिसमें मातृ-पोषण की कमी, खराब स्वच्छता, जलवायु परिवर्तन और संघर्ष-ग्रस्त इलाके शामिल हैं।

यह भी पढ़ें: अंतिम संस्कार के लिए पैसे और सुसाइड लेटर छोड़कर बुजुर्ग ने की आत्महत्या, बुढ़ापे से था परेशान

रिपोर्ट से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर डॉ. बॉबी राइनर का कहना है कि एक ही रणनीति से सभी क्षेत्रों में सुधार लाना संभव नहीं है। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि वैश्विक नीतियों को अब मातृ-पोषण, स्वच्छता, संक्रमण-नियंत्रण और सामाजिक सुरक्षा के संयुक्त मॉडल की ओर जाना होगा ताकि इस संकट को कम किया जा सके।

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Published On: Dec 10, 2025 | 07:43 AM

Topics:  

  • Child Care
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