इजरायली टैंक, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Israel Ground Offensive Lebanon: मिडिल ईस्ट की जंग में एक बहुत बड़ी सैन्य और कूटनीतिक हलचल सामने आई है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) के बढ़ते दबाव के बीच लेबनानी सेना ने आधिकारिक रूप से सरेंडर करते हुए अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। लेबनान की सरकारी सेना ने रमीश और ऐन एबेल जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों को खाली कर दिया है जिसे इजरायल के जमीनी हमले के लिए एक ‘खुला निमंत्रण’ माना जा रहा है।
लेबनानी सेना का पीछे हटना इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। इजरायल लंबे समय से दक्षिण लेबनान में एक ‘बफर जोन’ बनाना चाहता था ताकि हिजबुल्लाह द्वारा किए जाने वाले रॉकेट हमलों को रोका जा सके। अब जब लेबनानी सेना हट चुकी है तो इजरायल के लिए इन इलाकों पर कब्जा करना और भी आसान हो गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर इजरायली टैंक इन शहरों की सड़कों पर नजर आ सकते हैं।
हालांकि लेबनानी सेना सीधे तौर पर इस युद्ध का हिस्सा नहीं थी लेकिन उसकी मौजूदगी एक ‘बैरियर’ का काम करती थी। अब हिजबुल्लाह इस मोर्चे पर पूरी तरह अकेला पड़ गया है और उसे अपनी रक्षा खुद करनी होगी। इजरायल अब इन इलाकों में एक ‘क्लीन-अप ऑपरेशन’ चलाने की तैयारी में है जिसका उद्देश्य हिजबुल्लाह के ठिकानों और उनकी खुफिया सुरंगों को जड़ से मिटाना है।
सेना के हटते ही इन इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों में भारी डर का माहौल है। लोग अपने घर छोड़कर उत्तर की ओर भाग रहे हैं, जिससे लेबनान में एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा होने की आशंका बढ़ गई है। लेबनानी सेना का पीछे हटना यह भी संकेत देता है कि वहां का प्रशासन अब और तबाही झेलने की स्थिति में नहीं है और हिजबुल्लाह के लिए जनसमर्थन भी कम हो रहा है।
यह भी पढ़ें:- सिर्फ ट्रंप की शर्तों पर थमेगी जंग, अमेरिका की ईरान को आखिरी चेतावनी; पेंटागन ने दिए ग्राउंड ऑपरेशन के संकेत
एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान के साथ समझौते की नई रणनीति पर विचार कर रहे हैं वहीं इजरायल बिना रुके अपनी जंग जारी रखे हुए है। लेबनान में मिली यह बिना लड़े जीत इजरायल के मिडिल ईस्ट में बढ़ते वर्चस्व को दर्शाती है।