अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (सोर्स- सोशल मीडिया)
US Strategy Against Iran Nuclear: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अमेरिका की भावी विदेश नीति और मध्य पूर्व के प्रति अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश अब अतीत की सैन्य गलतियों को दोहराने के मूड में नहीं है और लंबे संघर्षों से दूरी बनाए रखना चाहता है। हालांकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर है, लेकिन ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत कूटनीति को प्राथमिकता दी जा रही है। वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी जनता के हितों की रक्षा करना और एक नए अंतहीन युद्ध को रोकना है।
वेंस ने ‘एयर फोर्स टू’ पर दिए इंटरव्यू में उन सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया कि अमेरिका फिर से किसी क्षेत्रीय संघर्ष में वर्षों तक उलझा रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही ईरान के विरुद्ध सैन्य विकल्प मेज पर हों, लेकिन वे किसी लंबे और स्थायी युद्ध में तब्दील नहीं होंगे। अमेरिका अब अपनी सेनाओं को बिना किसी ठोस अंत वाले अभियानों में झोंकने की गलती नहीं करना चाहता है और क्षेत्र में संयम बरतना चाहता है।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि ट्रंप के पास ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए कूटनीतिक और सैन्य दोनों ही विकल्प वर्तमान में मौजूद हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रशासन कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है, लेकिन यह पूरी तरह से ईरानी शासन के आने वाले समय के व्यवहार पर निर्भर करेगा। जिनेवा में जारी वार्ताओं के बीच यह संतुलन बनाए रखना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि कोई समाधान अभी तक नहीं मिला है।
इराक युद्ध में अपनी सेवाएं दे चुके जेडी वेंस विदेशी हस्तक्षेपों को लेकर हमेशा संशय में रहे हैं और उनका मानना है कि ट्रंप की सोच भी इसी दिशा में है। उन्होंने आगाह किया कि अमेरिका को अतीत की सैन्य विफलताओं से सीख लेनी चाहिए और बहुत सतर्क रहकर ही अब कोई अगला सैन्य कदम बढ़ाना चाहिए। ट्रंप की नीतियां स्पष्ट रूप से केवल अमेरिकी जनता के लाभ और उनकी सुरक्षा को केंद्र में रखकर बनाई गई हैं ताकि देश सुरक्षित रहे।
वेंस का तर्क है कि इजरायल एक रणनीतिक सहयोगी है, लेकिन पार्टी के भीतर इस रिश्ते को लेकर उठने वाली अलग-अलग आवाजों को भी सुना जाना चाहिए। मध्य पूर्व में दो दशकों से अधिक की सैन्य मौजूदगी के बाद अब समय आ गया है कि अमेरिका अपने विदेशी हस्तक्षेप को काफी हद तक सीमित करे। यूरोप और अन्य मध्यस्थों के माध्यम से जारी शांति प्रयास इस अस्थिर क्षेत्र में तनाव कम करने और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।