इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (सोर्स-सोशल मीडिया)
Netanyahu On Israel Iran Conflict Escalation: ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति के लिए बातचीत शुरू हो चुकी है। लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उनका यह कड़ा संघर्ष अभी नहीं रुकेगा। यह गंभीर स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब इज़राइल-ईरान संघर्ष में तेज़ी से पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा है कि आतंकवादी ताकतों के खिलाफ उनका सैन्य अभियान किसी भी कीमत पर जारी रहने वाला है।
बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि इजरायल ईरान और उसके सहयोगियों से पूरी ताकत से लड़ता रहेगा। उन्होंने अपने बयान में तुर्की के नेता एर्दोगन की कड़ी आलोचना की और कहा कि वह आतंकवादियों की आर्थिक और सैन्य मदद कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने एर्दोगन पर कुर्द नागरिकों का क्रूर नरसंहार करने का भी एक बहुत ही गंभीर और चिंताजनक आरोप लगाया है।
अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम घोषित होने के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान में बहुत बड़ा हमला किया। इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के कई प्रमुख ठिकानों को अपना निशाना बनाया जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी भारी निंदा हुई। हालांकि इजरायल ने पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्धविराम लेबनान के चल रहे हिंसक संघर्ष पर बिल्कुल भी लागू नहीं होता है।
शांति समझौते की मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक विनाशकारी बयान पर Netanyahu पूरी तरह भड़क गए। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल को खत्म करने का आह्वान किसी भी न्यूट्रल आर्बिटर सरकार से कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने पाकिस्तान को साफ चेतावनी दी कि इजरायल के विनाश की बात को वे किसी भी सूरत में सहन नहीं कर सकते हैं।
इस विवाद के इतिहास पर गौर करें तो 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर संयुक्त हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने तुरंत मिसाइल और ड्रोन से बड़े हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना कड़ा नियंत्रण स्थापित कर लिया। इन भारी हमलों और व्यापक नुकसान के बाद ही दोनों देशों के बीच दो सप्ताह का संघर्ष विराम हाल ही में लागू किया गया है।
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शांति वार्ता शुरू होने से पहले ईरानी नेता गालिबाफ ने अपनी कुछ महत्वपूर्ण और बड़ी शर्तें पूरी दुनिया के सामने खुलकर रखी थीं। उन्होंने लेबनान में तत्काल प्रभाव से संघर्ष विराम और फंसी हुई ईरानी संपत्तियों की रिहाई को इस बातचीत का मुख्य आधार बताया था। हालांकि इसके विपरीत अमेरिकी अधिकारियों ने संपत्तियां अनफ्रीज करने की सभी खबरों से पूरी तरह से साफ इनकार कर दिया है।