इजरायल ने लितानी नदी पार कर ब्यूफोर्ट किले पर फहराया झंडा, 24 साल बाद फिर मिली बड़ी कामयाबी

Israel Captures Beaufort Castle: इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा कर लिया है। जिसे हिजबुल्लाह के खिलाफ यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है।
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इजरायल ने ब्यूफोर्ट किले पर फहराया झंडा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Israel Captures Beaufort Castle Litani River: इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल करने का दावा किया है। इजरायली ब्रॉडकास्ट कॉर्प ने रविवार सुबह सोशल प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसी तस्वीरें शेयर की हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय सैन्य गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

इन तस्वीरों में दक्षिणी लेबनान के नबातियेह शहर के पास स्थित ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले की चोटी पर इजरायली राष्ट्रीय ध्वज और गोलानी ब्रिगेड का झंडा फहराते हुए दिखाया गया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इस सैन्य उपलब्धि को एक 'रणनीतिक जीत' करार दिया है।

ब्यूफोर्ट किले पर 24 साल बाद इजरायल की वापसी

इजरायली रक्षा बल के प्रवक्ता ने 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें इलाके में तैनात सैनिकों की तस्वीरें जारी की गई हैं। प्रवक्ता के अनुसार, इजरायली सेना अब लितानी नदी के उत्तर में हिजबुल्लाह के ठिकानों के खिलाफ लगातार और आक्रामक हमले कर रही है। आईडीएफ ने अब तक की अपनी सैन्य उपलब्धियों को 'तारीफ के काबिल' बताया है।

यह सफलता इजरायल के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लगभग 24 सालों के बाद इजरायली सेना ने इस रणनीतिक ऊंचाई पर फिर से कदम रखा है। रक्षा मंत्री काट्ज ने इस पल को याद करते हुए लिखा कि गोलानी ब्रिगेड के नेतृत्व में इजरायली सेना ने लितानी नदी के पार अपने ऑपरेशन का विस्तार करते हुए इस किले को अपने नियंत्रण में ले लिया है।

शहीदों को श्रद्धांजलि

ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि इजरायल के लिए एक ऐतिहासिक बदला और सम्मान का विषय भी है। इजराइल काट्ज ने कहा कि यह जीत 'ब्यूफोर्ट की वीरतापूर्ण लड़ाई' के 44 साल बाद मिली है। विशेष रूप से, यह सफलता 'गैलीली के लिए शांति' युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के स्मरण दिवस के दिन मिली है।

रक्षा मंत्री ने उन गोलानी ब्रिगेड के सैनिकों को याद किया जिन्होंने 1982 की लड़ाई में इस किले के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। बता दें कि 1982 में जब आईडीएफ ने पहली बार इस किले पर कब्जा किया था, तब गोलानी ब्रिगेड के छह सैनिक मारे गए थे। इसके बाद 1982 से लेकर 2000 तक यानी कुल 18 वर्षों तक यह किला इजरायल के नियंत्रण में रहा था। जिसे बाद में खाली कर दिया गया था।

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