लिपुलेख मुद्दे पर नेपाल ने चला नया दांव; बालेन शाह ब्रिटेन को बनाना चाहते हैं मध्यस्थ, जानें क्या है प्लान?

Balen Shah Lipulekh UK Mediation: नेपाल के पीएम बालेन शाह ने भारत के साथ जारी लिपुलेख सीमा विवाद को सुलझाने के लिए ब्रिटेन से मध्यस्थता की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे पर अब नया दांव चला है।
Nepal Plays a New Card on the Lipulekh Issue: Balen Shah Seeks to Appoint Britain as Mediator—Find Out What the Plan Is.
बालेन शाह, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Nepal Balen Shah Lipulekh UK Mediation News In Hindi: नेपाल और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रविवार को संसद में एक बड़ा बयान देते हुए भारत के साथ विवादित लिपुलेख मुद्दे पर ब्रिटेन (UK) की मध्यस्थता की मांग की है।

बालेन शाह ने इस विवाद को द्विपक्षीय स्तर से ऊपर उठाकर इसका अंतरराष्ट्रीयकरण करने का प्रयास किया है, जिसे भारत के खिलाफ एक रणनीतिक पैंतरे के रूप में देखा जा रहा है।

संसद में क्या बोले बालेन शाह?

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रविवार को संसद में एक लंबा भाषण दिया, जिसमें उन्होंने सीमा विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि मामला केवल एक पक्षीय नहीं है। शाह के मुताबिक, 'सिर्फ भारत ने नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा जमा रखा है।' उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले का सही तरीका यही है कि दोनों पक्ष मेज पर बैठकर बातचीत करें और समाधान निकालें।

ब्रिटेन की भूमिका पर जोर

बालेन शाह ने प्रस्ताव दिया कि भारत-नेपाल की सरकारों को इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और भौगोलिक विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम बनानी चाहिए जो वैज्ञानिक आधार पर सीमा का निर्धारण कर सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस संबंध में भारत की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं और दोनों देश विशेषज्ञों की टीम बनाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, सबसे चौंकाने वाला बयान ब्रिटेन की भूमिका को लेकर रहा। शाह ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर यूके सरकार से भी संपर्क किया है। उनका तर्क है कि चूंकि भारत-नेपाल की वर्तमान सीमाएं ब्रिटिश राज के दौरान तय की गई थीं, इसलिए इस विवाद को सुलझाने में ब्रिटेन को दिलचस्पी लेनी चाहिए और एक मध्यस्थ के रूप में हस्तक्षेप करना चाहिए।

क्या है विवाद की जड़?

नेपाल और भारत के बीच तनाव हाल ही में तब बढ़ा जब 29 अप्रैल को भारत और चीन ने लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने की घोषणा की। नेपाल ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया। नेपाल का दावा है कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार महाकाली नदी के पूर्व का पूरा इलाका, जिसमें लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी शामिल हैं, उसका हिस्सा है।

दूसरी ओर, भारत ने नेपाल के इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भारत सरकार का स्पष्ट रुख है कि लिपुलेख दर्रा कैलाश मानसरोवर का प्राचीन मार्ग है और 1954 से ही भारत के प्रभावी नियंत्रण और उपयोग में है। भारत ने कहा है कि नेपाल के एकतरफा दावे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।

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