

General Raja Subramani CDS: भारतीय रक्षा व्यवस्था के लिए 31 मई 2026 खास रहा। जनरल अनिल चौहान के रिटायर होने के बाद, जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में कमान संभाल ली है।
जब दुनिया भर में युद्ध के बादल मंडरा रहे हों, तब भारत जैसे विशाल देश की तीनों सेनाओं- थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच एक मजबूत कड़ी का होना राष्ट्रीय सुरक्षा की पहली शर्त है। जनरल सुब्रमणि का यह पदभार संभालना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे एक ऐसे समय में आए हैं जब भारतीय सेनाएं अपने इतिहास के सबसे बड़े संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रही हैं।
जनरल राजा सुब्रमणि को भारतीय सेना का एक अत्यंत रणनीतिक और अनुभवी योद्धा माना जाता है। उन्हें पाकिस्तान और चीन से जुड़े पेचीदा और संवेदनशील मामलों का गहरा जानकार माना जाता है। उनके करियर ग्राफ पर नजर डालें तो उन्होंने भारतीय सेना के सबसे महत्वपूर्ण 'नॉर्दन कमांड' के साथ-साथ 'सेंट्रल कमांड' में भी बड़ी जिम्मेदारियां निभाई हैं। सीडीएस बनने से पहले वे वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के पद पर रह चुके थे और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट में सैन्य सलाहकार के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। यह अनुभव उन्हें न केवल सीमाओं की भौगोलिक चुनौतियों को समझने में मदद करता है, बल्कि दिल्ली के गलियारों में बनने वाली रणनीतियों में भी उनकी पकड़ को मजबूत बनाता है। उनके पास पीवीएसएम और एवीएसएम जैसे विशिष्ट सेवा सम्मान हैं, जो उनकी काबिलियत की तस्दीक करते हैं।
नए सीडीएस के सामने सबसे बड़ी और जटिल चुनौती 'इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड' को हकीकत में बदलना है। वर्तमान में हमारी तीनों सेनाओं के पास कुल 17 अलग-अलग कमांड हैं, जो अपनी-अपनी सर्विस के हिसाब से काम करती हैं। जनरल सुब्रमणि का मुख्य काम इन सभी को मिलाकर कुछ चुनिंदा थिएटर कमांड्स में बदलना है, ताकि युद्ध की स्थिति में तीनों सेनाएं एक ही आदेश पर एक साथ हमला कर सकें। रिपोर्ट्स की मानें तो यह योजना कई सालों से फाइलों में चल रही है और इसका ब्लू प्रिंट भी तैयार है, लेकिन इसे जमीन पर उतारना आसान नहीं है। पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने भी स्वीकार किया था कि असली चुनौती सैन्य ढांचे से ज्यादा लोगों की 'सोच और मानसिकता' को बदलने की है। जनरल सुब्रमणि को सेनाओं के भीतर इस बदलाव के लिए सहमति बनानी होगी ताकि भारत आधुनिक युद्ध कला में दूसरे देशों से पीछे न रहे।
सीडीएस का पद केवल एक ओहदा नहीं, बल्कि एक सेतु है जो तीनों सेनाओं को जोड़ता है। जनरल सुब्रमणि को सेनाओं की कार्यसंस्कृति, प्रशिक्षण और विशेष रूप से उनकी खरीद प्रक्रियाओं में वास्तविक तालमेल यानी 'जॉइंटनेस' स्थापित करनी होगी। अभी आर्मी, एयरफोर्स और नेवी की अपनी अलग ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक्स व्यवस्थाएं हैं। थिएटर कमांड बनने के बाद इन सभी को एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाना होगा।
सीडीएस न केवल मिलिट्री ऑपरेशंस में बल्कि 'डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स' के सेक्रेटरी के तौर पर सरकार को सिंगल प्वाइंट मिलिट्री सजेशन्स देने के लिए भी जिम्मेदार होते हैं। उनकी सफलता इस बात पर टिकी होगी कि वे इन तीनों के बीच किसी भी प्रकार के टकराव को खत्म कर उन्हें एक संगठित ताकत के रूप में कैसे पेश करते हैं।
भारत की सेनाएं इस समय 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं, लेकिन इसके साथ ही आधुनिकीकरण की रफ्तार को बनाए रखना भी जरूरी है। जनरल सुब्रमणि के सामने यह एक बड़ा संकट होगा कि स्वदेशी हथियारों की डिलीवरी में होने वाली देरी के बावजूद सेना की युद्धक क्षमता कम न होने पाए।
उदाहरण के तौर पर, स्वदेशी लड़ाकू विमान 'तेजस मार्क-1ए' मिलने में हुई देरी ने वायु सेना की चिंताएं बढ़ाई हैं। नए सीडीएस को यह सुनिश्चित करना होगा कि रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के साथ-साथ सेनाओं को मिलने वाले आधुनिक हथियारों की टाइमलाइन प्रभावित न हो। इस पूरी प्रक्रिया में, नौसेना में भी बड़े बदलाव हो रहे हैं, जहां वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन 31 मई से नए नेवी चीफ का पद संभाल रहे हैं। इन सभी अधिकारियों को एक टीम के रूप में काम करना होगा ताकि भारत एक 'सशस्त्र शक्ति' के रूप में दुनिया के नक्शे पर और अधिक मजबूती से उभर सके।