ईरान के दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और अन्य अधिकारियों के जनाजे में जुटी भीड़ (सौजन्य पीटीआई)
दुबई : ईरान के दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी, विदेश मंत्री हुसैन अमीराब्दुल्लाहियन और अन्य अधिकारियों के जनाजे में शामिल होने और मातम मनाने के लिए मंगलवार को लोगों के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया है। ईरान की सरकार ने दिवंगत राष्ट्रपति के सम्मान में कई कार्यक्रम आयोजित किये हैं। साथ ही वह इसके जरिये पश्चिम एशिया में शक्ति प्रदर्शन भी करना चाहती है।
मातम में जुटेगी लाखों की भीड़
ईरान में शिया धर्म आधारित शासन में विशाल प्रदर्शन हमेशा से अहम रहे हैं। यहां तक कि 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान भी तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह रुहुल्लाह खुमैनी के स्वागत में लाखों लोग राजधानी तेहरान की सड़कों पर उतर आए थे। दस साल बाद उन्हें सुपुर्द ए खाक किए जाते समय भी लाखों लोग शामिल हुए थे। पड़ोसी बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में 2020 में मारे गए रिवोल्यूशनरी गार्ड के जनरल कासिम सुलेमानी के जनाजे में एक अनुमान के अनुसार 10 लाख लोग शामिल हुए थे।दिवंगत राष्ट्रपति रईसी, विदेशमंत्री अमीराब्दुल्लाहियन और अन्य के जनाजे में इतनी ही भीड़ जुटेगी या नहीं, इसे लेकर अभी सवाल हैं क्योंकि इनकी मौत हेलीकॉप्टर हादसे में हुई है और रईसी देश के इतिहास में सबसे कम मतदान वाले चुनाव में जीते थे एवं उन्होंने सभी विरोधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी।
खुशी का इजहार किया तो होगी सख्त कार्रवाई
अभियोजकों ने पहले ही चेतावनी दी है कि किसी ने रईसी के निधन पर खुशी का इजहार किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हेलीकॉप्टर हादसे के बाद से ही तेहरान की सड़कों पर भारी तादाद में सुरक्षाबल तैनात हैं। रईसी की चर्चा ईरान के सर्वोच्च नेता 85 वर्षीय अयातुल्लाह अली खामनेई के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर होती थी लेकिन अब यह संभावना समाप्त हो गई है। राष्ट्रपति चुनाव 28 जून को कराने की घोषणा की गई है और शीर्ष नेता के उत्तराधिकारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
शियाओं के पवित्र शहर कौम भी ले जाए जाएंगे शव
हेलीकॉप्टर जिस स्थान पर रविवार को दुर्घटनाग्रस्त हुआ था उसके नजदीकी प्रमुख शहर तबरेज की संकरी गलियों से होकर मारे गए लोगों के ताबूत मंगलवार को जब ले जाए जा रहे थे तो हजारों की संख्या में लोग काले मातमी लिबास में ताबूतों के साथ चल रहे थे। उनमें से कुछ लोग ताबूतों पर फूल बरसा रहे थे और लाउडस्पीकर पर रोते हुए लोग मारे गए लोगों को शहीद बता रहे हैं। शवों को मंगलवार को तेहरान लाए जाने से पहले शियाओं के पवित्र शहर कौम ले जाया जाएगा। बुधवार को मारे गए लोगों के जनाजे की नमाज खामनेई के नेतृत्व में पढ़ी जाएगी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सुपुर्द ए खाक किए जाने के मौके पर अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति किस तरह से होगी।
‘‘मैं रईसी के निधन पर शोक नहीं मनाऊंगा।”
रईसी के शासन काल में ही ईरान ने रूस को ड्रोन की आपूर्ति की, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बम गिराने के लिए किया जा रहा है। लिथुआनिया के विदेश मंत्री गैब्रिलियस लैंड्सबर्गिस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘मैं ईरान को शोक संदेश भेजने में सहज महसूस नहीं कर रहा हूं जो यूक्रेन में आम नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए ड्रोन भेज रहा है।” ब्रिटेन के सुरक्षा से जुड़े मंत्री टॉम तुगेंदट ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी पोस्ट में लिथुआनिया के विदेश मंत्री की तरह ही भावना व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘‘ राष्ट्रपति रईसी के शासन में उनके अपने देशों में हजारों लोगों की हत्या की गई, यहां ब्रिटेन और पूरे यूरोप में लोगों को निशाना बनाया गया। मैं उनके निधन पर शोक नहीं मनाऊंगा।”
मशहाद शहर में किया जाएगा सुपुर्द-ए-खाक
जुलूस के रूप में रईसी के जनाजे को बृहस्पतिवार को उनके गृहनगर बीरजंद ले जाया जाएगा और वहां से पवित्र मशहाद शहर में इमाम रज़ा की दरगाह में उन्हें सुपुर्द ए खाक किया जाएगा। इमाम रज़ा एकमात्र शिया इमाम हैं जो ईरान में दफन हैं। इस दरगाह पर हर साल लाखों जायरीन आते हैं। सदियों से दरगाह का मैदान फारसी इतिहास के नायकों का कब्रगाह रहा है। यहां पर दफन किया जाना दुर्लभ सम्मान माना जाता है। ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद अली रज़ाई की मौत 1981 में बम धमाके में हो गई थी। उन्हें तेहरान में दफनाया गया था।
ईरान की धर्म अधारित शासन व्यवस्था लोगों को सार्वजनिक शोक सत्र में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए पांच दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है। आमतौर पर, सरकारी कर्मचारी और स्कूली बच्चे ऐसे आयोजनों में सामूहिक रूप से भाग लेते हैं। राष्ट्रपति की हादसे में मौत के बाद शोक संदेश के साथ चुटकुले भी ऑनलाइन प्रसारित हो रहे हैं। समाचार एजेंसी आईएसएनए के अनुसार ईरान के शीर्ष अभियोजक ने पहले ही एक आदेश जारी कर रईसी और दुर्घटना में मारे गए अन्य लोगों के खिलाफ झूठी जानकारी और अपमान करने वाले संदेश प्रकाशित करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है।
(एजेंसी)